मालेगांव 2008 विस्फोट मामले में सीआरपीसी 313 के तहत सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए गए हैं। आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, समीर कुलकर्णी, अजय रहीरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और सुधाकर चतुर्वेदी एनआईए कोर्ट पहुंचे हैं।
विशेष एनआईए अदालत द्वारा सीआरपीसी 313 के तहत साध्वी प्रज्ञा सिंह और अन्य आरोपियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह आरोपी नंबर एक हैं। कोर्ट ने बयान शुरू करने से पहले सभी आरोपियों को निर्देश दिए। अभी तक कुल 323 बयान दर्ज किए जा चुके हैं। साथ ही, 115 गवाह सभी आरोपियों के लिए समान हैं। कोर्ट ने कहा कि यह बयान कोई शपथ बयान नहीं है, बल्कि इसे मामले में आगे जांच के काम आ सकता है।
वहीं, विशेष एनआईए अदालत ने आरोपियों के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने अदालत द्वारा उनके मौखिक बयान दर्ज करने से कुछ समय पहले प्रश्नावली की एक प्रति देने की मांग की थी।
अदालत ने सीआरपीसी की संशोधित धारा 313 (5) के तहत इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है। एनआईए अदालत ने सभी आरोपियों को यह भी अनुमति दी है कि यदि वे चाहें तो वे अपने सीआरपीसी 313 के मौखिक बयानों के लिए अदालत में लिखित दलीलें दाखिल कर सकते हैं।
इससे पहले, आरोपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने 25 सितंबर को अपनी हालत के लिए कांग्रेस और एटीएस को जिम्मेदार ठहराया था। प्रज्ञा सोमवार को मुंबई में स्थित एनआईए कोर्ट में पेश हुई थीं। उनके साथ ही अन्य आरोपी भी कोर्ट के सामने पेश हुए थे। उन्होंने इस दौरान पत्रकारों से चर्चा में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार और एटीएस पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।
ये था मामला
29 सिंतबर 2008 की रात मालेगांव में एक बड़ा धमाका हुआ था। मोटर साइकिल में हुए इस बम धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि इसमें 101 लोग घायल हुए थे। इस मामले की सुनवाई एक विशेष एनआईए कोर्ट में चल रही है।
बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि मैं पहले पूरी तरह स्वस्थ थी। लेकिन पुलिस की कस्टडी में आई तो मेरी समस्या बढ़ती गई। मैं जेल गई तो स्वस्थ थी, लेकिन आने पर बिस्तर पर निकली। कैंसर हुआ, रीढ़ की समस्या और न्यूरो की परेशानी हुई। इसका कारण कांग्रेस की सरकार और एटीएस की प्रताड़ना है।
ठाकुर ने कह था कोर्ट के सामने आज सभी को उपस्थित होना था। हम तीन दिनों से यात्रा कर मुंबई पहुंचे, लेकिन मेरा स्वास्थ्य ऐसा नहीं है कि मैं इतनी लंबी यात्रा कर कोर्ट पहुंच सकूं। जज ने जब कहा कि प्रतिदिन कोर्ट में मौजूद रहना होगा तो मैंने अदालत से विनती करते हुए कहा कि कांग्रेस से प्रताड़ना के कारण मेरा स्वास्थ्य खराब हुआ। ऐसे में मुझे थोड़ी राहत दी जाए और इसे कोर्ट ने स्वीकार किया।