34 साल बाद आखिरकार कांग्रेस नेता सज्जन कुमार सिख विरोधी दंगों के दोषी करार दिए गए और दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। 31 अक्टबूर 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजधानी दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सिख विरोधी दंगों में 3325 लोग मारे गए थे। जिसमें 2733 सिर्फ दिल्ली में मारे गए थे।
आजाद भारत में हुए इस कत्लेआम के बाद 19 नवंबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिल्ली बोट क्लब में इकट्ठा भीड़ के सामने कहा, "जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी, तो हमारे देश में कुछ दंगे-फसाद हुए थे। हमें मालूम है कि भारत की जनता को कितना क्रोध आया, कितना ग़ुस्सा आया और कुछ दिन के लिए लोगों को लगा कि भारत हिल रहा है। जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है।"
बयान से फैली सनसनी
प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य में दंगों के दौरान अनाथ और बेघर हो गए उन हजारों सिखों का कोई जिक्र नहीं था। ऐसा लगा मानो उनके जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा हो। आम लोगों में यह संदेश गया, 'मानो इन हत्याओं को जायज ठहराने की कोशिश की गई।'
इस बयान ने उस समय और आने वाले काफी समय तक खूब सनसनी मचाई और विपक्ष ने इसे अपने पक्ष में खूब भुनाया। कांग्रेस पार्टी को इस बयाव को सही ठहराने में अभी भी काफी बचाव करनी पड़ता है।
सिख विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि पर कुछ साल पहले एक किताब छपी थी- 'व्हेन ए ट्री शुक डेल्ही।' इस किताब में सिख विरोधी दंगों के दौरान समाज की डरानेवाली सच्चाई और पीड़ितों के परिजनों का दर्द उकेरा गया है। साथ ही यह किताब राजनेताओं के साथ पुलिस के गठजोड़ का भी पर्दाफाश करती है।
सबसे पहले क्या हुआ
इंदिरा गांधी की हत्या की खबर आग की तरह फैल गई। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह उत्तरी यमन की अपनी यात्रा पूरी होने से पहले ही दिल्ली लौटे आए। हिंसा की शुरुआत उस समय हुई थी जब जैल सिंह हवाई अड्डे से इंदिरा गांधी के दर्शन करने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जा रहे थे। एम्स से कुछ पहले आरके पुरम के पास उनके वाहन काफले पर स्थानीय लोगों ने जलती मशालें फेंक दी थी।
तरलोचन सिंह जैल सिंह के तत्कालीन प्रेस अधिकारी थे। वे बाद में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष बने। तरलोचन के मुताबिक, "ज्ञानी जी की कार सबसे आगे थी। उनके पीछे सचिव और उसके पीछे मेरी कार थी। आरके पुरम इलाके में आगे की दोनों कारें निकल गईं। मेरी कार के सामने जलती मशालें लेकर कुछ लोग आ गए और हमारे ऊपर मशालें फेंकी गईं। लेकिन ड्राइवर ने किसी तरह से बचाकर मुझे घर तक पहुंचाया।"
वह बताते हैं, "ज्ञानी जी जैसे ही इंदिरा जी के दर्शन करके एम्स से नीचे उतरे, लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनकी कार को रोकने की कोशिश की। ज्ञानी जी के सुरक्षाकर्मियों ने बड़ी जद्दोजहद के बाद उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला।"