पिछले साल दिसंबर में संसद की सुरक्षा में सेंध का मामला सामने आया था। जब कुछ लोग रंगीन धुएं के कनस्तरों के साथ लोकसभा और संसद परिसर में घुस गए थे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सुरक्षा समीक्षा की थी।सीआईएसएफ के कुल 140 कर्मियों ने सोमवार से संसद भवन परिसर की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है। सूत्रों ने बताया कि ये जवान आगंतुकों और उनके सामान की तलाशी लेंगे। इसके अलावा, इमारत को अग्नि सुरक्षा कवर भी प्रदान करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि सेना पहले से मौजूद अन्य सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क में है, ताकि वे 31 जनवरी को शुरू होने वाले बजट सत्र के दौरान अपने काम के लिए तैयार रहें। सूत्रों ने कहा, सीआईएसएफ नए और पुराने संसद भवन में हवाई अड्डे जैसी सुरक्षा प्रणाली अपनाएगी। जिसमें एक्स-रे मशीनों, स्कैनर और हाथ से पकड़े जाने वाले डिटेक्टर के जरिए जूते, भारी जैकेट और बेल्ट आदि की तलाशी ली जाएगी।
सीआईएसएफ में करीब 1.70 लाख कर्मी हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) गृह मंत्रालय के तहत काम करता है। यह देश के 68 असैन्य हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र व परमाणु उर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है।सूत्रों ने इससे पहले बताया था कि नए व पुराने संसद परिसर और उनसे जुड़े भवनों को सीआईएसएफ के व्यापक सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा। जिसमें संसद सुरक्षा सेवा (पीएसएस), दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के कर्मी शामिल होंगे।
इस बीच, संसद भवन के कार्यवाहक संयुक्त सचिव (सुरक्षा) की ओर से एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया गया है। जिसमें संसद के कर्मचारियों को संसद भवन परिसर के भीतर तस्वीरें खिंचवाने और वीडियो बनाने को लेकर चेतावनी दी गई है। परिपत्र में कहा गया है कि यह सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत प्रतिबंधित गतिविधियां हैं। बार-बार निर्देश के बाद भी कई कर्मचारी इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। संसद परिसर भारत की सबसे संवेदनशील जगह है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत परिसर में फोटोग्राफी या वीडियो शूटिंग पर प्रतिबंध सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
परिपत्र में कहा गया है कि अधिकारियों और आगंतुकों को मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन से संसद भवन परिसर के भीतर किसी भी तरह की फोटोग्राफी की सख्त मनाही है। संसद, सांसदों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों और उसके कर्मचारियों की सुरक्षा करना 'संसद सुरक्षा सेवा' की प्राथमिकता है।