ऊना। बारिश, भूस्लखन, बिजली गिरने सहित मौसम की मार के कारण पशुपालकों के पशुओं को नुकसान होता है तो इसकी तुरंत विभाग को रिपोर्ट करें। पंचायत स्तर पर पशु डिस्पेंसरियों में तैनात फार्मासिस्टों को भी पशु पालक मौके पर बुलाकर उन्हें घटना की जानकारी दे सकते हैं।
इसके लिए विभाग पशुपालकों को उनकी भैंस और नसली गायों की मौत पर 30,000 की मदद सरकार की ओर से दी जाएगी। सरकारी सुविधा का लाभ पशु पालकों को तभी मिल पाएगा, यदि नुकसान मौसम की मार के कारण हुआ होगा। इसके लिए पशु पालन विभाग के विशेषज्ञ और डॉक्टर मवेशी की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच-पड़ताल भी करेंगे। इसके बाद भी अंतिम रिपोर्ट बनाई जाएगी।
गौरतलब है कि जिला ऊना में कृषि के साथ-साथ पशु पालन के लिए भी जाना जाता है। जिला में बड़ी संख्या के पशु पालकों ने डेयरी फार्म खोल रखे हैं। इसके साथ लोगों ने अपने स्तर पर घर में भी दो से तीन पशुओं को पालते हैं। इसके जिला में मौसम के कारण हर वर्ष सैकड़ों मवेशियों की मौत हो जाती है, लेकिन जागरूकता के कारण पशु पालक सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पाते।
पशु पालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. जेएस सेन ने कहा कि मौसम की मार से नुकसान के चलते पालतू मवेशियों की मौत पर पशुपालकों को सरकारी की तरफ से मदद उपलब्ध करवाई जाती है। इस संबंध में पशु पालकों को घटना के दौरान ही विभाग को सूचित करना होगा।