सोलन। पहले से सूखे की मार झेल रहे किसानों को अब टमाटर की पौध में कमरतोड़ रोग से नुकसान झेलना पड़ रहा है। अभी तक जिले में 40 फीसदी फसल इस रोग के कारण खराब हो गई है। कई क्षेत्रों में पौधशाला में ही यह बीमारी पौधों को लग रही है।
हालांकि अधिकतर पानी वाले क्षेत्रों में तो किसानों ने पौध खेतों में रोप दी है। इन क्षेत्रों में भी किसान सैकड़ों खराब पौधे खेतों से निकाल रहे हैं। जिले में 8100 हेक्टयेर भूमि पर मुख्य नकदी फसल टमाटर की खेती होती है और 90 फीसदी किसान टमाटर पर निर्भर है।
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टमाटर में लग रहे इस रोग से खेतों में पौध बचाना मुश्किल हो गया है। खेतों में रोपाई के दो दिन बाद ही पौधे बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कई क्षेत्रों में शिमला मिर्च की पौध में भी यह रोग लग रहा है।
किसानों को खास सावधानी बरतने की जरूरी
केवीके कंडाघाट की विशेषज्ञ डॉ. आरती शुक्ला ने बताया कि पौध तैयार करते समय किसानों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। कमरतोड़ रोग फफूंद के कारण मिट्टी में ही पनप जाता है। बीमारी से नर्सरी में ही पौध की कमर सड़ कर टूट जाती है। इसे कॉलर रॉट रोग भी कहते हैं। इसके उपचार के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड तीन ग्राम प्रति लीटर पानी या मैंकोजब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से सींचे।