संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के स्कूलों में अध्यापकों और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूलों में सूखा, गीला कचरा और गंदे पानी को दोबारा प्रयोग किया जाएगा। शिक्षा विभाग और एक निजी संस्था अर्थजस्ट अध्यापकों और विद्यार्थियों को इसकी जानकारी देगी। पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहतरीन कार्य करने वाले स्कूलों को राष्ट्र स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
स्कूलों में विद्यार्थियों को हाथ धोने के बाद व्यर्थ बह रहे पानी का दोबारा प्रयोग सिखाया जाएगा। सूखे और गीले कचरे से खाद बनाने की भी जानकारी दी जाएगी। संस्था के समन्वयक आशीष और श्रेय गुप्ता ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत पहले अध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद अध्यापक बच्चों को इसकी जानकारी देंगे।
इसमें कचरे को खुले में न फेंककर उसका खाद और सजावटी सामान के लिए किया जाएगा। हाथ धोने के बाद व्यर्थ गिरने वाले पानी को एकत्र कर उसका प्रयोग पौधों की सिंचाई समेत शौचालय के प्रयोग में किया जा सकेगा। जून माह से इस पर कार्य शुरू हो जाएगा। इस संबंध में स्कूलों की प्रतियोगिताएं भी होंगी। बेहतरीन स्कूलों को सम्मानित भी किया जाएगा।
जिला विज्ञान समन्वयक अमरीश शर्मा ने बताया कि निजी संस्था के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण की पहल की है। इसमें बच्चों के साथ शिक्षकों को भी जोड़ा जा रहा है। इससे पहले भी ऐसे कार्यक्रमों में सोलन के दो निजी स्कूलों को राष्ट्र स्तर पर सम्मान मिला है।