सोलन। प्रदेश में एमडीआर टीबी (दूसरी स्टेज) के मरीजों को अब रोजाना इंजेक्शन लगवाने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीजों का इलाज ओरल रजिमेंट (मौखिक दवा) से हो सकेगा। दवाइयों से उपचार कर ही टीबी को निगेटिव करने में मरीज की मदद की जा रही है।
मरीज को टीबी के साथ अन्य बीमारी होने पर भी शॉर्ट और ऑल ओवर रजिमेंट दवाइयां दी जा रही हैं। ओरल उपचार से मरीजों को रोजाना लगने वाले इंजेक्शन से छुटकारा मिलेगा। वहीं टीबी के मरीज भी जल्द ठीक हो पाएंगे। इससे टीबी के फैलने पर भी रोक लगेगी। प्रदेश में ऐसे मरीजों का ओरल उपचार शुरू कर दिया है। इसके बेहतर रिजल्ट भी देखने को मिल रहे हैं।
अभी तक प्रदेश में एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज इंजेक्शन से संभव हो पाता था। ऐेसे मरीजों को करीब दो से तीन साल यानी 24 से 26 माह तक रोजाना इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे। ऐसे इलाज छह से नौ माह में रिजल्ट आते थे।
मरीजों को रोजाना इंजेक्शन लगने से जहां शरीर में दाग व अन्य समस्याएं भी आती थी, वहीं उसे दर्द भी सहना पड़ता था। रोजाना इंजेक्शन लगने के कारण कहीं जाने में भी असमर्थ था। अब ओरल रजिमेंट से मरीज का इलाज किया जा रहा है। इससे मरीज टीबी से जल्द ठीक हो रहे हैं यानी मरीज में टीबी जल्दी निगेटिव हो जाता है।
उधर, क्षय रोग के एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. सतीश ने बताया कि एमडीआर टीबी मरीजों का ओरल रजिमेंट से इलाज किया जा रहा है। इससे मरीजों को इंजेक्शन न देकर दवाइयों से इलाज किया जा रहा है। ऐसे मरीज जल्द ही पॉजिटिव से निगेटिव हो रहे हैं।
इस दवा से हो रहा इलाज
एमडीआर टीबी मरीजों को इंजेक्शन के बजाय बेडेकुलेन कंटेनिंग रजिमेंट से इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों में टीबी का प्रभाव कम है, उनका इलाज शॉर्ट यानी नौ से 11 माह तक चलता है। इनमें एक सप्ताह में मरीज में रिजल्ट दिखना शुरू हो जाता है और वह जल्द निगेटिव होता है। जिन मरीजों में एमडीआर टीबी के अलावा अन्य कोई बीमारी होती है तो इलाज ऑल ओवर लोंगर रजिमेंट यानी 18 से 20 माह तक होता है और मरीजों में एक माह में रिजल्ट दिखने शुरू हो जाते हैं।
20 से 22 लाख रुपये की दवाई सरकार दे रही मुफ्त
एमडीआर टीबी मरीज के इलाज के लिए 20 से 22 लाख रुपये की लागत है। प्रदेश में सरकार की ओर से मरीजों का इलाज मुफ्त किया जा रहा है। इससे मरीजों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा है। जल्द मरीज के निगेटिव होने से अन्य में टीबी फैल भी नहीं सकेगा।
सरकार के निर्धारित लक्ष्य पर चल रहा कार्य
प्रधानमंत्री की ओर से भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए 2025 का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं प्रदेश सरकार ने प्रदेश में 2021 तक टीबी मुक्त बनाने का निर्णय लिया था लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने में देरी हो गई। इसके बाद सरकार ने 2024 का लक्ष्य रखा है। इसे लेकर विभाग ने टीम बनाई है जो इस कार्य को तेजी से रही है। टीम की ओर से टीबी मरीजों के प्राथमिक संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाया जाता है और बलगम सैंपल जांचे जा रहे हैं। सरकार के टीबी मुक्त लक्ष्य पर विभाग कार्य कर रहा है।