खरुणी स्थित सदाव्रत में 300 वर्ष पुरानी भंडारे की प्रथा भी बरकरार
जोहड़ से आवाजाही करने वाली संगत के लिए लगाया जाता है भंडारा
मेले में दो अप्रैल से रविवार तक डेढ़ लाख संगत ने किया लंगर ग्रहण
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। गुरु नानक देव की चरण स्पर्श धरती जोहड़जी साहिब में दो अप्रैल से शुरू हुए मेले में शीश नवाने के पश्चात पंजाब की संगत ने वापसी शुरू कर दी है। मेले का पहला सप्ताह मैदानी क्षेत्र पंजाब के श्रद्धालुओं के नाम रहता है। जोहड़जी में गुरुनानक देव के ध्यान सेवा के पश्चात शनिवार से वापसी शुरू हो गई है। जोहड़जी से 40 किलोमीटर की दूरी पर खरुणी में संगत के लिए लंगर का आयोजन होता है। यहां पर रुककर सारी संगत माल पुड़े खीर, चाय पकोड़े का भंडारा छककर आगे बढ़ती है।
खरूनी गांव के सबसे वृद्ध 85 वर्षीय सुच्चा सिंह सैनी ने बताया कि सदाव्रत स्थल खरूनी में जब से जोहड़जी साहिब में मेला लगता आ रहा तब से यहां पर वापसी संगत के लिए से लंगर लगता आ रहा। पहले मेलार्थी पैदल जाते थे और खाने पीने का साधन कम थे। मेलार्थियों की सुविधा के लिए खरुणी के लोग यहां पर भंडारा लगाते थे। यह व्यवस्था अभी भी जारी है। यहां पर सारी संगत के लिए लंगर, चाय और दवाइयों को भी दिया जाता है। लगभग डेढ़ लाख के करीब संगत के लंगर ग्रहण किया। इस अवसर पर बीडीसी सदस्य दाता राम, भगवान सैनी, ठाकुर दास, जोगिंदर सिंह, हाकम सिंह, चरणजीत सिंह, गुरमेल सिंह, गुरमुख सिंह, दसौंधी राम, बेली राम सैनी, आज्ञा राम, केवल सिंह, सुखविंदर सिंह सैनी, राजेन्द्र सिंह सैनी, हरदेव सैनी, बलदेव सिंह, स्वर्ण सिंह आदि बहुत से ग्रामीण लंगर भंडारे की सेवा में मौजूद रहे।