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गंगा को हुआ था अभिमान, भगवान शिव ने जटाओं में कर लिया था धारण : सौरभ

Sat, 06 Apr 2024 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
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शिव महापुराण में नवें दिन सुनाई गंगा के धरती पर आने की कथा
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शिव दयाल ट्रस्ट सोलन में चल रही है शिव महापुराण की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शिव दयाल ट्रस्ट लोअर बाजार सोलन में चल रही शिव महापुराण कथा के नौवें दिन कथा वाचक सौरभ शर्मा ने मां गंगा के धरती पर अवतरित होने की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भागीरथी के 60 हजार पूर्वज प्रेत योनि में चले गए थे, जिनके उद्धार के लिए उन्हें मां गंगा को धरती पर लाने के बारे में बताया गया। भागीरथी ने सबसे पहले ब्रह्मा की तपस्या की मगर उन्होंने गंगा को धारण करने से इंकार कर दिया। उसके बाद भगवान विष्णु की तपस्या की तो उन्होंने भगवान शंकर के पास जाने को कहा। अंत में भागीरथी ने भगवान शंकर की तपस्या की। जब भगवान शंकर प्रकट हुए और तपस्या का कारण पूछा तो भागीरथी ने कहा कि वह मां गंगा को धरती पर लाना चाहते हैं। भगवान शंकर ने तथास्तु कहकर उन्हें वचन दे दिया। कथावाचक ने बताया कि गंगा अभिमान से भरी हुई थी और कहा कि मुझे कोई धारण नहीं कर सकता। इसी अभिमान को चूर करने के लिए भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर लिया और गंगा कई वर्षों तक उसी में घूमती रही। उन्होंने बताया कि अंत में भागीरथी ने भगवान शिव से प्रार्थना की तो उन्होंने केवल एक बाल से गंगा को धरती पर छोड़ दिया और भागीरथी के 60 हजार पूर्वजों को प्रेत योनि से मुक्त करवाया। आज भी गंगा गंगोत्री से निकलकर गंगा सागर तक बह रही है और करोड़ों लोगों का उद्धार कर रही हैं। कथा वाचक सौरभ शर्मा ने कहा कि हमें किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए। कर्मों का फल सभी को भोगना पड़ता है। कर्म किसी को नहीं छोड़ता। इसलिए सभी को अच्छे कर्म करने चाहिए। उन्होंने बताया कि मंदिरों में मूर्तियों का स्पर्श नहीं करना चाहिए। अपने कुलिष्ठ, कुल्जा व कुल पुरोहित का सदैव सम्मान करना चाहिए ये सब कुछ देने में सक्षम हैं। इस दौरान उन्होंने कई भजन भी प्रस्तुत किए।
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