नालागढ कालेज में छात्र संगठन की बैठक में भाग लेते हुए पदाधिकारी। संवाद
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नालागढ़ (सोलन)। पूर्व छात्र संगठन के संविधान में संशोधन के प्राचार्य के प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई गई। संगठन का कहना है कि कॉलेज और छात्रों के उत्थान के लिए संगठन बनाया गया है। इसमें किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीफ पैटर्न के साथ संगठन के प्रधान के हस्ताक्षर होने पर ही पैसा निकला जा सकेगा। बैठक में गरीब छात्रों की पढ़ाई का खर्च उठाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
नालागढ़ कॉलेज प्राचार्य डॉ. पवन सलारिया की अध्यक्षता में पूर्व छात्र संगठन की बैठक हुई। प्राचार्य चाहते थे कि छात्र संगठन के चीफ पैटर्न को ही कोष निकालने का एकाधिकार होना चाहिए। पहले छात्र संगठन के संविधान में प्रधान, सचिव और कैशियर को यह अधिकार दिया गया है।
बैठक में संगठन के उपप्रधान ईश्वर चौधरी ने कहा कि संगठन छात्रों के उत्थान के लिए कार्य करता है। जो भी फैसला होगा, सहमति से लिया जाएगा। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि जो गरीब छात्र गरीबी के चलते अपनी पढ़ाई सुचारु नहीं रख पा रहे हैं, उनके लिए संगठन सहायता करेगा। बैठक में संगठन के प्रधान नरेश गोयल, सलीम कुरैशी, प्रो. सतविंद्र सिंह, धमेंद्र राणा, परमिंद्र सिंह और हरविंद्र सिंह ने भाग लिया।