सोलन। ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए निगरानी शुरू हो गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी कार्यों की मोनीटरिंग कर रहे हैं। 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतें तय अवधि में विकास कार्यों में पैसा खर्च नहीं करती हैं तो आगामी दिनों में स्कीम के बजट में कटौती हो जाएगी।
यह कटौती विभाग करेगा। पंचायतों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रत्येक जानकारी साझा करने के लिए कहा गया है। ऑनलाइन पोर्टल में खास यह है कि किसी भी पंचायत का व्यक्ति कार्यों के बारे में पोर्टल से पता लगा सकता है।
15वें वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायतों को लाखों की किस्त जारी की जाती है। इस राशि को पंचायतों की ओर से विकास कार्यों में खर्च करना आवश्यक है। पंचायतें मनमर्जी से कार्यों को भी नहीं करवा सकतीं। इसके लिए कार्यों की पूरी जानकारी पोर्टल पर दी गई है।
जैसे ही पंचायतें 15वें वित्त आयोग का पैसा खर्च करती हैं, उसका पूरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। ठेकेदारों को कार्य के बदले दिए जाने वाली किस्त भी पोर्टल से देय होगी। जिला पंचायत अधिकारी रमेश मिन्हास ने बताया कि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता लाई गई है। 15वें वित्त आयोग के तहत अगर पंचायतें विकास कार्यों में पैसा खर्च नहीं करती हैं तो जारी होने वाली अनुदान राशि में कटौती भी हो सकती है। इसकी निगरानी ऑनलाइन ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर हो रही है।
जनसंख्या के आधार पर जारी होती है किस्त
15वें वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायतों को अनुदान राशि जनसंख्या के आधार पर जारी होती है। हालांकि 10 फीसदी अनुदान एरिया के हिसाब से जारी किया जाता है। इसके तहत पंचायतों की ओर से पहले कार्यों का नियोजन, तकनीक और जियो टैगिंग के बाद ही विभाग किस्त जारी करता है। ग्राम सभा की बैठकों में पारित की गई स्कीमों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
गुणवत्ता जांच के लिए बनेगी कमेटी
पंचायतों में विकास कार्यों को पूरा करने के बाद गुणवत्ता जांच के लिए कमेटी का गठन भी किया जाएगा। इसमें स्थायी कमेटी गठित होगी और स्थानीय लोगों को भी कमेटी में सदस्य बनाया जाएगा। इससे लोगों को कार्यों के बारे में जानकारी मिलेगी।