सोलन। प्रदेश की एकमात्र सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी को 60 वर्षों बाद अपना भवन मिला है। यह लाइब्रेरी पुराने उपायुक्त कार्यालय में शिफ्ट की जाएगी। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। पुराने उपायुक्त कार्यालय की पांच मजिलों में लाइब्रेरी को स्थापित किया जाएगा। इसे शिफ्ट करने से पहले बने भवन का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मा सौंपा गया है। लाइब्रेरी का नक्शा और अनुमानित लागत बनाने के लिए पत्र लिखा गया है। पुराने उपायुक्त कार्यालय में लाइब्रेरी के स्थानांतरण से कई लोगों को फायदा पहुंचेगा। वहीं लाइब्रेरी का किराया देने से भी छुटकारा मिलेगा। अभी तक प्रतिमाह लगभग छह हजार रुपये किराया ट्रस्ट को देना पड़ता था। कई बार लाइब्रेरी के अपने भवन के लिए मांग रखी गई लेकिन अब प्रदेश सरकार ने मांग पूरी की है।
सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी सोलन का उद्घाटन 28 जून 1959 में तत्कालीन उपराज्यपाल राजा बजरंग बहादुर सिंह भदरी ने किया था। तब से लेकर वर्तमान तक लाइब्रेरी किराये के भवन में चल रही है। भवन मिलने के बाद लाइब्रेरी के कुछ विभागों को पुराने उपायुक्त भवन में शिफ्ट किया गया जबकि अन्य विभाग पुराने भवन में ही हैं। इन्हें जीर्णोद्धार के बाद शिफ्ट किया जाना है।
इस लाइब्रेरी की खास बात यह है कि यहां पर 150 से 200 साल पुरानी किताबें हिंदी, संस्कृत, बंगाली, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेजी भाषाओं में मौजूद हैं। हस्त लिखित धार्मिक किताबों का संग्रहालय भी है। यह किताबें उसी स्थिति में है जिस स्थिति में इसे लिखा गया था। हालांकि ये किताबें फट चुकी हैं लेकिन अभी भी उस समय की कलाकृति और लेखनी किताबों में मौजूद है। लाइब्रेरी में संविधान की कापी भी मौजूद है।
सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन मीना देवी ने कहा कि लाइब्रेरी को शिफ्ट करने के लिए कवायद चली हुई है। पुराने उपायुक्त भवन में कुछ बदलाव होने है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को लिखा गया है। जल्द ही कार्य शुरू होगा। सभी पुस्तकें पुराने उपायुक्त भवन में उपलब्ध करवाई जाएंगी।