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हरियाणा में बढ़े दूध के दाम, हिमाचल में दिखने लगा असर

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कालाअंब (सिरमौर)। हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में दूध के दाम बढ़ने का असर हिमाचल के उपभोक्ताओं पर भी पड़ने लगा है। दुग्ध उत्पादकों ने 10 रुपये प्रति लीटर तक दाम बढ़ा दिए हैं। इससे हिमाचल के प्रवेश द्वार कालाअंब सहित अन्य क्षेत्रों में भी दूध महंगा मिल रहा है।
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इसके साथ-साथ दूध निर्मित उत्पाद भी महंगे हो गए हैं। पशुचारे के संकट के बीच उपजे इन हालात की मार अब उपभोक्ताओं पर भी पड़ रही है। खल, फीड, चोकर और बिनौला के अलावा पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना और गर्मियों में हरे चारे की समस्या भी इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
क्षेत्र में अप्रैल माह के अंत तक गाय का दूध 40-45 रुपये प्रतिलीटर और भैंस का दूध 50 रुपये प्रतिलीटर बिक रहा था। वर्तमान समय में गाय का दूध 50 रुपये और भैंस का दूध 60 रुपये प्रतिलीटर बिक रहा है। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में 80 फीसदी दूध की आपूर्ति हरियाणा से होती है।
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कालाअंब और आसपास के गांवों में पशुपालक या दूध उत्पादक नाममात्र ही हैं। लिहाजा औद्योगिक नगरी कालाअंब, मोगीनंद और खैरी सहित जिला मुख्यालय नाहन में अधिकांश दूध की हरियाणा से आपूर्ति हो रही है। कई दूध विक्रेता और पशुपालक दूरदराज से अपने वाहन लेकर कालाअंब और नाहन में दूध बेचने पहुंचते हैं।
दूध के दामों में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी होने से प्रदेश के उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ गया है। दाम बढ़ने से दुग्ध उत्पादों जैसे दही, पनीर, खोया, मक्खन और घी आदि के दामों में भी वृद्धि हुई है। दही 55 से 60 रुपये किलोग्राम, खुला पनीर 250 से बढ़कर 280 रुपये और पैक पनीर 375 रुपये तक बिक रहा है। लस्सी का एक गिलास 50 रुपये और खोये से बनी मिठाइयों के दामों में भी 30 से 50 रुपये की वृद्धि हुई है।
खाद्य एवं आपूर्ति निगम के कार्यवाहक जिला नियंत्रक सिरमौर नरेंद्र धीमान ने बताया कि खाद्य वस्तुओं के दामों को लेकर फिलहाल सरकार ने कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास 31 मार्च तक दामों पर नियंत्रण की अधिसूचना थी। इसके बाद खाद्य वस्तुओं की दरें निर्धारित करने की अधिसूचना नहीं मिली है।
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