वादी के पक्ष में अवैध कब्जे के लिए मांगे गए हर्जाना की मांग खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सिविल अदालत ने करीब सात वर्ष पुराने भूमि कब्जा विवाद में प्रतिवादियों को तीन बीघा भूमि का खाली कब्जा वादी नैन सिंह को सौंपने का निर्देश दिया है। हालांकि अदालत ने वादी की हर्जाना देने की मांग खारिज कर दी।
वादी नैन सिंह ने वर्ष 2019 में अदालत में दावा दायर कर आरोप लगाया था कि शिलाई क्षेत्र की उसकी 3 बीघा घासनी भूमि पर पड़ोसी पक्ष ने जबरन कब्जा कर लिया। वादी ने बताया कि वर्ष 2013 और 2014 में भी भूमि में हस्तक्षेप को लेकर विवाद हुआ था। इसकी शिकायत पुलिस में की गई थी। बाद में निषेधाज्ञा का आदेश भी उसके पक्ष में पारित हुआ, लेकिन अक्तूबर 2019 में प्रतिवादियों ने दोबारा भूमि पर कब्जा कर लिया। वहीं, अमर सिंह एवं अन्य 9 प्रतिवादियों ने अदालत में कब्जे के आरोपों से इनकार किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि विवादित भूमि पर वादी का स्वामित्व रिकॉर्ड से सिद्ध है और प्रतिवादियों ने भी इसे चुनौती नहीं दी। न्यायालय ने माना कि दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद अवश्य है, लेकिन इससे वादी के स्वामित्व अधिकार प्रभावित नहीं होते। अदालत ने कहा कि कब्जा दिलाने की कार्रवाई के दौरान राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की सही पहचान कराई जाएगी। इससे सीमा विवाद भी स्पष्ट हो जाएगा। सिविल जज विकास कपूर ने वादी के पक्ष में पारित निर्णय में प्रतिवादियों को तीन बीघा का खाली कब्जा वादी को सौंपने का आदेश दिया। वहीं, अवैध कब्जे के लिए मांगा गया वार्षिक हर्जाना स्वीकार नहीं किया गया।