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शिक्षक नहीं होने से खफा 11 विद्यार्थियों ने बदला स्कूल

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सतौन (सिरमौर)। ग्रामीण क्षेत्र में घरद्वार पर शिक्षा मुहैया करवाने के सरकारी दावे धरातल पर धराशाही हो रहे हैं। सरकार ने स्कूल तो खोल दिए हैं, लेकिन शिक्षक नहीं भेजे। परिणामस्वरूप विद्यार्थी अपने घर से कई किलोमीटर दूर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। शिलाई क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौकी मृगवाल का भी यही हाल है। यहां शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थी स्कूल बदलने को विवश है। लगातार इस स्कूल के विद्यार्थी करीब 15 किलोमीटर दूर सतौन स्कूल जाने को विवश हो गए हैं।
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जानकारी के अनुसार कुछ अरसे पहले बड़वास में वरिष्ठ स्कूल खोला गया था। ग्रामीण क्षेत्र की राजनीति के चलते सरकार ने मई 2020 में यहां से महज पांच किलोमीटर दूर चौकी मृगवाल स्कूल का दर्जा बढ़ाकर कर हाई स्कूल से वरिष्ठ स्कूल कर दिया लेकिन स्टाफ नहीं भेजा। वर्तमान में यहां इतिहास, राजनीति शास्त्र, कंप्यूटर साइंस ओर अंग्रेजी विषय के प्रवक्ताओं के पद खाली हैं। इस समय एलटी और मुख्याध्यापक का पद भरा हुआ है। पद रिक्त होने के कारण बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं।
स्कूल में पिछले सत्र में जमा एक में 11 छात्र थे। इस वर्ष उत्तीर्ण होकर यह सभी जमा दो में पहुंच गए लेकिन अध्यापक नहीं होने के कारण सभी ने स्कूल बदल दिया। सभी छात्रों ने 10 किलोमीटर दूर सतौन में दाखिला लिया है। इसके अलावा इस वर्ष जमा एक में 18 छात्रों ने दाखिला लिया था। इसमें से तीन छात्र किसी अन्य स्कूल में चले गए हैं। वर्तमान में स्कूल में जमा एक में 15 छात्र हैं। यदि समय पर और अध्यापक नहीं पहुंचे तो यह छात्र भी स्कूल छोड़ने को मजबूर होंगे।
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स्कूल में मौजूद एलटी अध्यापक राकेश कुमार ने बताया कि जमा दो के छात्र स्कूल से प्रमाण पत्र ले गए हैं। छात्र सतौन, कमरऊ और कांटी मशवा के स्कूल में दाखिला ले रहे हैं। उच्च शिक्षा उपनिदेशक कर्मचंद ने बताया कि स्कूलों में खाली चल रहे पदों के बारे आला अधिकारियों को पत्राचार किया गया है।
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राजपाल शर्मा----------संजय भारद्वाज
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