सुनिता ने बताया जब बेटी 12 साल की उम्र में गांव के छोटे से मैदान में खेल रही थी तो उसके चाचा ने प्रतिभा को पहचाना । उन्होंने ही उसका धर्मशाला क्रिकेट अकादमी तक पहुंचाने में सहयोग किया। बताया कि रेणुका के पिता स्व. केहर सिंह ठाकुर क्रिकेट देखने के बहुत शौकीन थे। जब कोई मैच होता था, तो अपने घर में टीवी नहीं होने पर दूसरों के घरों में बैठकर क्रिकेट का आनंद उठाते थे। कहते थे कि अपने बच्चों को भी क्रिकेटर बनाउंगा। आज वह जिंदा होते को उनको बहुत खुशी होती।