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केंद्र सरकार के खिलाफ निकाली रैली

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केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करते यूनियनों क - फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सोमवार को सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे। इस दौरान रामपुर में राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 पर रैली निकालकर लोगें ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर विभिन्न संगठनों से जुड़े कर्मचारियों और कामगारों ने जमकर प्रदर्शन किया। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सरकार ने मजदूर, कर्मचारी और किसान तबके पर लगातार हमले किए हैं।
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हिमाचल सरकार भी इसका अनुसरण कर रही है। देश में काम कर रहे विभिन्न विभागों, क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों, कर्मचारियों और किसानों के खिलाफ नीतियां बनाई जा रही हैं। कोविड-19 महामारी में सबसे ज्यादा पीड़ित और प्रभावित मजदूर-किसान और मेहनतकश जनता हुई है। इस कारण 15 करोड़ मजदूरों की नौकरियां खत्म हो गई है और वे बेरोजगार हो गए। मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण एक हजार से ज्यादा मजदूरों को कोरोनाकाल में अपने घर पैदल जाते हुए मौत हो चुकी है। इसी दौरान सार्वजनिक क्षेत्र को कौड़ियों के भाव पूंजीपतियों को बेचने से स्पष्ट है कि मोदी सरकार पूरी तरह से बड़े पूंजीपतियों के आगे नतमस्तक हो चुकी है। केंद्र सरकार ने फिक्स टर्म रोजगार की अधिसूचना पहले ही जारी कर दी है।
इससे मजदूर नियमित रोजगार से वंचित हो जाएंगे। मजदूरों के काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। मोदी सरकार ने आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा वर्करों सहित 70 योजनाओं को बंद करने की पहले ही घोषणा कर दी गई है। नई शिक्षा नीति से यह हमला और बढ़ेगा।
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केंद्र सरकार बैंक, बीएसएनएल, पोस्टल, रक्षा, बिजली, रेलवे, कोयला, सीमेंट, बंदरगाहों, एनटीपीसी, एनएचपीसी, एयरपोर्ट, एसजेवीएनएल, बीएचईएल, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि सार्वजनिक क्षेत्रों के विनिवेश और निजीकरण की योजना बना चुकी है। नेशनल मोनिटाइजेशन पाइपलाइन के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को कौड़ियों के भाव बेचना इसी मुहिम का एक हिस्सा है।
मजदूरों के ईपीएफ के पैसों को सट्टा बाजार में लगाया जा रहा है। मजदूरों और कर्मचारियों को पेंशन लाभ से वंचित किया जा रहा है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। इस मौके पर बिहारी सेवगी, रणजीत ठाकुर, प्रेम चौहान, दिनेश मेहता, तुला राम शर्मा, हितेश हष्टा, राजेश ठाकुर, नरेंद्र देष्टा, नील दत्त, रिंकू राम, हरदयाल जेल्टा, कपिल और सुरेंद्र जोगटा सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
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