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माता महेश्वरी शड़ी का दो दिवसीय जठेंजो उत्सव शुरू

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग उपमंडल के मतियाना क्षेत्र की प्रसिद्ध ग्राम देवी महेश्वरी माता शड़ी के दो दिवसीय जठेंजो उत्सव का आगाज शनिवार को हुआ। प्राचीन देव परंपरा को निभाते हुए देवी अपनी पालकी में सवार अपने सैकड़ोें कल्याणों के साथ सुबह सबसे ऊंचे नाग टीले पर पहुंचीं। इस स्थान पर देवी की परंपरागत तरीकों से पूजा हुई।
देवी के कल्याणे अपने साथ सिड्डू और देसी घी लेकर पहुंचे थे। पूजा के बाद सभी को प्रसाद स्वरूप इसका वितरण किया गया। दो साल कोरोना के कारण देवी अपने मंदिर से इस उत्सव में नहीं निकलीं, लेकिन इस बार पूरी परंपरा को निभाया गया।
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नाग टीले से शाम के समय देवी रोणी स्थित अपने स्थान पर पहुंचीं। यहां देवी की जातर लगी, जिसमें देव वाद्यों के साथ देवी नृत्य हुआ। इस उत्सव में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। उत्सव में कल्याणों के अलावा बड़ी संख्या में मेहमान भी भाग लेते हैं।
देवता के गुर नारायण दत्त शर्मा, पुजारी केशवराम शर्मा, भंडारी मस्तराम केवला और देवी के प्रमुख कारदार मदन चौहान के अनुसार हर साल माह की पांचवीं तिथि को यह उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। इसके पीछे जो किवदंती है, उसके अनुसार सदियों पहले इस टीले पर एक राक्षस रहता था, जो लोगों को काफी परेशान करता था।
देवी ने इस राक्षस का संहार किया, तबसे देवी को टीले पर ले जाकर उनकी पूजा की परंपरा निभाई जा रही है। शनिवार रात्रि रौणी में अपने देवरे में रुकने के बाद देवी महेश्वरी रविवार को वापस शड़ी स्थित अपने मंदिर में विराजमान हो जाएंगी।
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उधर, देवता कालूनाग जदून के क्षेत्र टिक्कर में भी जठेंजो का आयोजन किया जाता है, जिसमें टिक्कर स्थल पर लोग पूजा-अर्चना करते हैं। इस अनुष्ठान में भी हजारों लोग भाग लेते हैं।
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