एक साल में बनना था बाईपास, न सड़क पक्की हुई और न सड़क हुई चौड़ी
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अप्रैल 2017 में शुरू हुआ था छह किलोमीटर बाईपास का निर्माण कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी रोहड़ू। महेंदली-समोली बाईपास सरकार की अनदेखी, सुस्त कार्यप्रणाली और जवाबदेही के अभाव की एक मिसाल बन गई है। नाबार्ड से 3.18 करोड़ रुपये मंजूर होने के बावजूद नौ साल बाद भी बाईपास अधूरा है। हालत यह है कि न सड़क पक्की हुई, न चौड़ीकरण पूरा हुआ और अब विभाग के पास काम आगे बढ़ाने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये कहां गए। लोक निर्माण विभाग ने अप्रैल 2017 में महेंदली से बखीरना तक करीब छह किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा और पक्का करने का काम शुरू करवाया था। योजना के तहत डंगों और नालियों का निर्माण होना था। इसके अलावा पैरापिट लगने थे और मेटलिंग होनी थी। विभाग के टेंडर में यह काम एक साल में पूरा होना था, लेकिन आठ साल बीतने के बाद भी केवल करीब दो किलोमीटर सड़क को खोदकर छोड़ दिया गया। आज बाईपास सड़क की हालत यह है कि जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी मिट्टी और बारिश के बाद मलबे के ढेर वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं। स्थानीय लोग इसे विकास नहीं, बल्कि सरकारी धोखे का प्रतीक बताते हैं।
इस बाईपास के बनने से रोहड़ू की चार पंचायतों के लोगों को सीधा लाभ मिलना था। चिड़गांव, सहित पूरे छौहारा क्षेत्र से आने-जाने वाले वाहनों को रोहड़ू बाजार में प्रवेश नहीं करना पड़ता और शहर को जाम से राहत मिलती। विपक्ष में रहते हुए वर्तमान के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने इस बाईपास सड़क को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए थे, लेकिन अब कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी सड़क की तस्वीर नहीं बदली।
महेंदली-समोली बाईपास सड़क का निर्माण पूरा करवाने के लिए मंत्री का डीओ मिला है। अब नया प्राक्कलन सरकार को भेजा जा रहा है। फिलहाल, विभाग के पास निर्माण शुरू करने के लिए बजट उपलब्ध नहीं है। -रवि भट्टी, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल रोहड़ू।
खस्ता हाल में अंधर में लटका महेंदली समोली बाईपास। संवाद