समाजसेवी अनुराग गुप्ता, पुष्पा खड़ूंजा, नीरज बंसल, हरीश और राजेश का कहना है प्रदेश सरकार गुणवतायुक्त शिक्षा प्रदान करने के दावे करती रही है, लेकिन धरातल पर कई स्कूलों के बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रहीं हैं। इस स्कूल को 16 वर्षों बाद भी भवन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी। जो शामलात भूमि शिक्षा विभाग चिह्नित कर रहा था, उस पर विवाद चला हुआ है। सभी पांच कक्षाएं, स्टोर कक्ष और कार्यालय एक कमरे में संचालित हो रहा है। बाकी सुविधाएं तो दूर शौचालय त की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
मजबूरन बच्चे खुले में शौच करते हैं। ऐसी दिक्कतों के कारण अब अभिभावक भी इस स्कूल में बच्चों को कम भेज रहे हैं। चार वर्ष पहले तक 30 बच्चे पढ़ते थे, अब यह संख्या सिमट कर 14 रह गई है। इस स्कूल में दो शिक्षक, मध्याह्न भोजन कर्मी व मल्टीपर्पज वर्कर सेवारत हैं। स्कूल की एसएमसी कमेटी प्रधान प्रोमिला देवी का कहना है कि पाठशाला में सुविधाओं के अभाव में अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। हालात नहीं बदले तो स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है।