स्कैन करते ही खाते में पैसा आने के बजाय भुगतान का अनुरोध दिखाई दे सकता है। यदि व्यक्ति बिना जांच किए इस भुगतान अनुरोध को मंजूर कर देता है तो उसके खाते से ही रकम कट सकती है। यानी जिस क्यूआर कोड को इनाम की राशि प्राप्त करने का माध्यम बताया गया था, वह वास्तव में भुगतान कराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी से पैसे प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने या यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध वेबसाइट, संदेश अथवा मंच से मिले क्यूआर कोड को स्कैन नहीं करना चाहिए।
प्राप्तकर्ता और राशि की पूरी जांच जरूरी
इसी तरह मोबाइल पर आने वाले किसी भी भुगतान अनुरोध को मंजूर करने से पहले प्राप्तकर्ता और राशि की पूरी जांच करनी चाहिए। लॉटरी, इनाम और कैश बैक के ऐसे प्रस्तावों पर भी तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। खासकर तब, जब इसके लिए पहले क्यूआर कोड स्कैन करने, भुगतान अनुरोध मंजूर करने या यूपीआई पिन दर्ज करने को कहा जा रहा हो। डीजीपी अशोक तिवारी का कहना है कि कैश प्राइज, लॉटरी या कैशबैक के नाम पर भेजे गए किसी भी संदिग्ध क्यूआर कोड को स्कैन न करें। पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने या भुगतान अनुरोध मंजूर करने की जरूरत नहीं होती।
ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत
यदि क्यूआर कोड के माध्यम से कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। पुलिस के अनुसार, शुरुआती समय में शिकायत दर्ज होने पर संबंधित लेनदेन को रोकने और ठगी की रकम को सुरक्षित करने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए घटना के बाद बैंक को भी तत्काल सूचना देना जरूरी है।