स्वच्छता मद में हो सकेगा इतना खर्च
स्वच्छता मद में सामुदायिक सोक पिट बनाने के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये प्रति सोक पिट और सामुदायिक कंपोस्ट पिट के लिए तीन हजार रुपये तक खर्च किए जा सकेंगे। गांव स्तर पर गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण एवं प्रसंस्करण के लिए शेड बनाने पर अधिकतम 20 हजार रुपये की सीमा तय की गई है। घरों से कचरा उठाने और परिवहन के लिए मोटर वाहन की सेवाएं लेने पर एक ग्राम पंचायत को कवर करने के लिए 10 हजार रुपये प्रति माह तक खर्च किया जा सकेगा।
सामुदायिक सैनिटरी कॉम्प्लेक्स के लिए 10 हजार
सामुदायिक सैनिटरी कॉम्प्लेक्स के रखरखाव पर 10 हजार रुपये प्रति माह और इसके निर्माण पर 90 हजार रुपये प्रति कॉम्प्लेक्स तक खर्च की अनुमति है। कचरा प्रबंधन के लिए स्वच्छता कर्मी या सपोर्ट एजेंसी की सेवाएं लेने पर भी 10 हजार रुपये प्रति माह की सीमा रखी गई है। वहीं ब्लॉक या ब्लॉक के किसी हिस्से को कवर करते हुए कचरे के परिवहन के लिए चार लाख रुपये सालाना तक खर्च किया जा सकेगा।
सामुदायिक कंपोस्ट यूनिट के रखरखाव पर 2500
इसके अलावा ओडीएफ प्लस सत्यापन के लिए प्रति गांव सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों पर आठ हजार रुपये, सेग्रीगेशन शेड के रखरखाव पर चार हजार रुपये प्रति माह और सामुदायिक कंपोस्ट यूनिट के रखरखाव पर 2500 रुपये प्रति माह तक खर्च किया जा सकेगा। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट या मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी के रखरखाव के लिए तीन लाख रुपये सालाना और गोबरधन प्लांट के संचालन एवं रखरखाव के लिए दो लाख रुपये सालाना तक की सीमा निर्धारित की गई है। स्लज मैनेजमेंट प्लांट के संचालन व रखरखाव के लिए एक लाख रुपये सालाना तक खर्च की अनुमति है।
योजना में दर्ज करना जरूरी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक कार्य संबंधित पंचायत के विकास प्लान में शामिल होना चाहिए। यदि 2026-27 के जीपीडीपी, बीपीडीपी व जेडपीडीपी में सूची से बाहर का कोई कार्य स्वच्छता मद में दर्ज है तो खर्च से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत योजना में संशोधन करना होगा। पंचायत सचिव से लेकर बीडीओ, जिला पंचायत अधिकारी और जिला परिषद के सीईओ तक को खर्च की प्रक्रिया की जांच और निगरानी करनी होगी। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि स्वच्छता मद की राशि केवल निर्धारित कार्यों पर ही खर्च हो। नियमों के विपरीत किया गया खर्च अनधिकृत माना जाएगा।