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डेढ़ सौ देवलुओं के साथ 150 किलोमीटर पैदल चलकर 1 मार्च को पहुंचेंगे मंडी

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सराजघाटी के आराध्य देव मगरू महादेव मंडी महाशिवरात्रि में भाग लेने के लिए छतरी से रवाना होते हुए। - फोटो : Mandi
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गोहर (मंडी)। सराजघाटी के छतरी स्थित आराध्य देवता मगरू महादेव शुक्रवार दोपहरबाद अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए छोटी काशी रवाना हुए हैं। देव मगरू महादेव 150 देवलुओं के साथ 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा के उपरांत एक मार्च शाम को छोटी काशी पहुंचेंगे।
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छतरी के आराध्य देवता जैसे ही अपने निवास से छतरी बाजार पहुंचे तो ढोल, नगाड़ों, करनाल, रणसिंघों और काहुलियों की गूंज से माहौल भक्तिमय हो गया। मगरू महादेव के जयकारों के साथ देवलुओं ने रथ के साथ नाचते गाते मंडी के लिए कूच किया।
देव मगरू महादेव जंजैहली, बगस्याड, थुनाग, गोहर, सेगली होकर बल्ह के बैहना गांव पहुंचेंगे। यहां देवता का रथ तैयार होगा और एक मार्च महाशिवरात्रि के दिन छोटी काशी पहुंचेंगे। इसी दिन मगरू महादेव राज देवता माधो राय के साथ दिव्य मिलन करेंगे।
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देवता के गूर गंगा राम ने कहा कि देव मगरू महाशिवरात्रि के लिए रवाना हो गए हैं। देव मगरू से पहले देव चपलांदू नाग छतरी से मंडी रवाना हो चुके हैं। चपलांदू नाग 28 फरवरी को मंडी पहुंचेंगे। इसके एक दिन बाद मगरू महादेव छोटी काशी पधारेंगे। आगामी रविवार को सराजघाटी के बड़ादेव विष्णु मतलोडा महाशिवरात्रि मेले के लिए प्रस्थान करेंगे।
मगरू महादेव का प्राचीन मंदिर सतलुज वर्गीय पहाड़ी शैली का उत्कृष्ट नमूना है। मंदिर तीन मंजिलों का है। मंदिर के भीतर गर्भगृह की छत नक्काशी से सजी है। इसमें महाभारत के वीरों को दर्शाया गया है। एक स्थान पर राजा जनक हल चलाते हुए दिखाए गए हैं।
एक जगह भीम को युद्ध करते हुए दिखाया गया है। कुछ लोगों का मत है कि यह मंदिर 13वीं सदी के मध्य में बना है। मंदिर के भीतर शिव और पार्वती की पाषाण प्रतिमा भी है। गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ है। संवाद
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