सब्जी मंडी भुंतर में सेब, नाशपाती और टमाटर लेकर पहुंचे किसान और बागवान।
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पतलीकूहल/कुल्लू। फल मंडियों में सेब सीजन के चलते इन दिनों रौनक बनी हुई है। सेब के हजारों क्रेट लेकर बागवान प्रतिदिन मंडियों में आ रहे हैं। बोली लगने से लेकर शाम तक यहां खूब चहल-पहल बनी हुई है। बागवानों को सेब की कमाई का पैसा तुरंत मिल रहा है। दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में सेब भेजने पर बागवानों को पैसा देरी से मिलता है। ऐसे में कोरोना के दौर में स्थानीय मंडियों की तरफ बागवानों का रुझान बढ़ा है।
गौर रहे कि पतलीकूहल सब्जी मंडी में एक महीने पहले तक सन्नाटा पसरा रहता था। लेकिन अगस्त के पहले सप्ताह में सीजन ने रफ्तार पकड़ी है। रॉयल सहित अन्य किस्म का सेब 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। बागवान नरोत्तम ठाकुर, रवि कुमार, जितेंद्र, किरण ठाकुर, बबलू और शेखर ने कहा कि सब्जी मंडी के लिए बागवान सुबह सात बजे से पहले ही जीप में सेब लेकर मंडियों तक पहुंच रहे हैं। इसके लिए कुछ बागवान तो बोली लगने से एक रात पहले ही सेब को आढ़तियों के पास पहुंचा रहे हैं, जिससे सुबह के समय उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए बाकायदा मालवाहक वाहनों के चालकों का निर्धारित किराया दिया जा रहा है। बागवानों के सेब को आढ़ती भी सुरक्षित रख रहे हैं। स्थानीय सब्जी मंडी में बागवानों को उनकी कमाई का पैसा हाथोंहाथ मिल रहा है। कई आढ़ती कैश या चेक में पैसे का लेन-देन कर रहे हैं। अब ऊझी घाटी के 80 फीसदी बागवान स्थानीय मंडियों में ही अपना उत्पाद बेचने लगे हैं। उधर, पतलीकूहल सब्जी मंडी में आढ़ती संघ के अध्यक्ष पूर्णचंद ठाकुर का कहना है कि आने वाले दिनों में मंडियों में और रौनक बढ़ेगी। उधर, एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया का कहना है कि स्थानीय फल एवं सब्जी मंडियों में ही अधिकतर बागवान अपना सेब बेच रहे हैं, जहां किसानों व बागवानों को उनके उत्पादों के बेहतर दाम भी मिल रहे हैं।