कुल्लू। जिला कुल्लू की सड़कों पर भटक रहे अधिकतर लावारिस जानवरों के लिए सरकार व प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में समाजसेवी इनका सहारा बनने के लिए आगे आ रहे हैं। इन लावारिस जानवरों के लिए विभूति आनंद भी किसी सहारे से कम नहीं है। यह पिछले 17 सालों से लावारिस जानवरों को सहारा बन रही है।
वर्तमान में उनके पास 80 लावारिस जानवर हैं, जिनका वह पालन-पोषण, उपचार समेत देखभाल कर रही है। खास बात यह है कि इस सामाजिक कार्य के लिए वह सरकार व प्रशासन से किसी तरह की कोई मदद भी नहीं ले रही है। गौरतलब है कि वर्तमान में सबसे अधिक मुश्किल लावारिस जानवरों को आ रही है। सड़कों पर भटक रहे इन जानवरों को हर किसी के डंडे खाने पड़ रहे हैं। कई बार ये जानवर सड़क हादसों का शिकार भी हो रहे हैं। साथ ही इनके कारण भी कई बार हादसे हो रहे हैं। विकास खंड कुल्लू की ग्राम पंचायत जलुग्रां के गांव टिपरूधार की विभूति आनंद दुर्घटना का शिकार और लावारिस जानवरों को अपने घर में पनाह दे रही है।
इन दिनों वह दो बछड़ों, एक गाय, आठ बिल्ल्यिों के अलावा 69 कुत्तों की देखभाल कर रही है। विभूति आनंद ने कहा कि वह 17 सालों से इस कार्य को कर रही है। इसके लिए उनका परिवार भी पूरा सहयोग कर रहा है। उन्होंने इस सामाजिक कार्य के लिए किसी तरह का सरकारी सहयोग नहीं लिया है। आगामी दिनों में वह संस्था बनाने पर विचार कर रही है। संवाद
घर में बेरोकटोक घूम रहे बेजुबान
समाजसेवी विभूति आनंद के घर में 11 कमरे हैं। इन सभी कमरों में बेजुबान बेरोकटोक घूम रहे हैं। उन्होंने कि इन जानवरों का पालन-पोषण घर के सदस्य मानकर कर रही है। बेजुबानों पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है।
उपचार के लिए जाना पड़ रहा 31 किमी दूर
जिला कुल्लू की जलुग्रां पंचायत का टिपरूधार गांव मुख्यालय से 31 किलोमीटर दूर स्थित है। बीमार होने पर जानवरों को उपचार के लिए गाड़ी कर पशु चिकित्सालय कुल्लू और मौहल लाना पड़ता है।
समाजसेवा में कर रही उत्कृष्ट कार्य : बीडीओ
विकास खंड कुल्लू अधिकारी जयवंती ठाकुर ने कहा कि विभूति आनंद समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी बच्चों की तरह इन लावारिस जानवरों का पालन-पोषण कर रही है।