कुल्लू। लाहौल-स्पीति जिले का सेब इन दिनों देश की विभिन्न मंडियों में पहुंच रहा हो। लेकिन जिला कुल्लू में अक्तूबर का आखिरी सप्ताह शुरू होने से पहले ही सेब का सीजन पूरी तरह से सिमट गया है।
फल मंडियों में इस बार सेब की रिकॉर्ड करीब 23 लाख पेटियां पहुंची हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी अधिक है। अब आढ़तियों ने सब्जी मंडियों से अपना सामान समेट लिया है। कोरोना के बीच घाटी के बागवानों का स्थानीय फल मंडियों पर भरोसा बढ़ा है। घाटी के अधिकतर छोटे बागवानों ने सेब को दिल्ली भेजने की बजाय स्थानीय मंडियों ही बेचा। आमतौर पर कुल्लू की सब्जी मंडियों में करीब सेब के 20 लाख तक बॉक्स पहुंचते हैं। लेकिन इस बार यह आंकड़ा 23 लाख तक पहुंचा है। आने वाले सालों में इसके और बढ़ने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि घाटी के बड़े बागवान ए ग्रेड सेब को बाहरी राज्यों की मंडियों में भेजते हैं। जहां पर उन्हें सेब के अच्छे दाम भी मिलते हैं। शुरूआत में कोरोना के चलते बागवानों ने सेब मंडियों में लाया। लेकिन जैसे ही कोरोना से हालात सामान्य हुए तो सेब देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचा। अब कुल्लू की सब्जी मंडी बंदरोल सहित अन्य मंडियों में रौनक गायब हो गई है। व्यापारी अपना सामान समेटकर लौट चुके हैं। सब्जी मंडी बंदरोल, आनी की खेगसू और पतलीकूहल मंडी में सबसे अधिक सेब कारोबार हुआ है। उधर, इस संबंध में कृषि उपज एवं विपणन समिति के कुल्लू व लाहौल-स्पीति सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि सेब सीजन पूरी तरह से निपट चुका है। अब मंडियों में सेब नहीं आ रहा है। कोरोना के बीच बागवानों का स्थानीय मंडियों पर भरोसा बढ़ा है। सीजन के बीच में दाम कम हुए। लेकिन आखिर में बागवानों को सेब के सही दाम मिले।