कुल्लू/खराहल। घाटी में सेब सीजन अंतिम चरण में पहुंच चुका है। बागवान अपने बगीचों में पौधों को संवारने में भी जुट गए हैं। तुड़ान के बाद बागवानों को बागवानी विभाग ने ब्लाईटॉक्स दवा का छिड़काव करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पौधों के स्पर और टहनियों के टूटने से कई बीमारियां पनप सकती हैं। इससे निजात पाने के लिए बागवानों को समय रहते तुड़ान के बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइट दवा की स्प्रे करनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि स्पर और टहनियों के क्षतिग्रस्त होने से मुख्यता कैंकर रोग का हमला पौधों पर हो सकता है। लिहाजा बागवानों को सेब तुड़ान के पश्चात ब्लाईटॉक्स दवा का छिड़काव करना जरूरी है। घाटी के बागवानों अमित, संजय , सुरेश, अशोक, कमल, चमन, राजेंद्र, महेश, अमन, गगन, राज और पवन आदि का कहना है कि सेब सीजन लगभग खत्म हो गया है। ऊंचाई बाले क्षेत्रों में सीजन अभी शेष है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार वे तुड़ान के बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइट दवा का छिड़काव करने की तैयारी में हैं। बागवानी विभाग के बागवानी विशेषज्ञ उत्तम पराशर बताते हैं कि सेब तुड़ान के बाद बागवान कॉपर ऑक्सीक्लोराइट 600 ग्राम दवा को दो सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि सेब तुड़ान के दौरान कई स्पर और टहनियां टूटने से पौधे पर कई कीट पनप सकते हैं। लिहाजा इससे निजात पाने के लिए इस दवा का छिड़काव करना चाहिए। वही, पौधों पर यूरिया की स्प्रे भी करनी चाहिए। इससे स्परों में मजबूती आ सकती है और आगामी फसल के सकारात्मक परिणाम होंगे।