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500 रुपये सैकड़ा बिक रहा कागजी अखरोट

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कुल्लू के ढालपुर में सायर उत्सव के दौरान अखरोट बेचता व्यक्ति। - फोटो : Kullu
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कुल्लू। सायर संक्रांति में अखरोट का विशेष महत्व है। देवी-देवताओं के पूजा-पाठ में भी संक्रांति में अखरोट को शामिल किया जाता है। जिसके चलते जिला मुख्यालय में अखरोट की अस्थायी दुकानें सजी हैं। लोग खरीदारी में कागजी अखरोट को पसंद कर रहे हैं। सीजन की शुरूआत में ही कागजी अखरोट 500 रुपये सैकड़ा के हिसाब से बिक रहा है। बादामी और भुर्ज किस्म का अखरोट भी 300 से 400 रुपये सैकड़ा के भाव से बेचा जा रहा है। हालांकि आगामी दिनों में अखरोट के दाम स्थिर रहेंगे या नहीं, इस पर अभी संशय बरकरार है। पिछले एक साल में अखरोट के दाम 150 रुपये तक बढ़े हैं। विगत वर्ष अखरोट 200 से 350 रुपये सैकड़ा बिका था। गौरतलब है कि सायर संक्रांति के लिए लोग अखरोट की अधिक खरीदारी करते हैं। जिला में फसल कम और मांग अधिक होने के चलते दामों में उछाल देखने को मिला है। जिला मुख्यालय कुल्लू में सजाई गई अस्थायी दुकानों में विभिन्न किस्मों का अखरोट बेचा रहा है। खरीदार कागजी किस्म को अधिक तरजीह दे रहे हैं। जिसका मुख्य कारण है कि यह अखरोट हाथ में ही आसानी से टूट जाता है। इसके अलावा खाने में भी यह बहुत स्वादिष्ट होता है। वहीं, बादामी और भुर्ज अखरोट भी खरीदारों के लिए दुकानों में उपलब्ध हैं। व्यापारी सोहन
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लाल, रतन, आमरू, देवी राम, मीना, शकुंतला ने कहा कि जिला कुल्लू के सायर संक्रांति को हर्षोल्लास से मनाया जाता है। संक्रांति में अखरोट को पूजा-पाठ में शामिल किया जाता है। इसके अलावा बड़े बुजुर्गों को जूब देने पर आशीर्वाद के तौर पर भी छोटों को अखरोट देने की परंपरा है। संक्रांति में मांग अधिक होने के चलते दामों में बढ़ोतरी हुई है। अभी जिला में अखरोट का शुरूआती दौर चल रहा है।
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