सैंज घाटी के मझाण गांव का देवता डुखरू नारायण देवलूओ के साथ न्यूली खड्ड को पार करते हुए
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी की शैंशर कोठी के मझाण गांव के देवता डुखरू नारायण दुर्गम गांव शाक्टी जा रहे हैं। रास्ते में एचपीपीसीएल की 100 मेगावाट प्रोजेक्ट की टनल आई। देवता ने टनल के भीतर से जाने से इन्कार किया। न्यूली खड्ड पार करने के निर्देश हारियानों को दिए। खड्ड के तेज बहाव के बीच हारियानों ने देवता का रथ दूसरी ओर पहुंचाया।
देवता डुखरू नारायण के कारदार मेहर चंद ने कहा कि देवता रैली मेला से अपने देवालय जाने के बजाय शाक्टी के लिए निकल पड़े हैं। देवता तीन दिन पहले मझाण से रैला के लिए आए थे और अब मेला खत्म होने के बाद हारियानों को शाक्टी जाने के निर्देश दिए। ऐसे में देवता को खड्ड पार कर दूसरी ओर पहुंचाना पड़ा है।
मान्यता है कि देवता टनल के रास्ते नहीं जाते हैं और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिला है। जब देवता ने टनल के बजाए खड्ड से जाने का निर्देश दिया। हारियान तेजा सिंह, पुणेराम, लालचंद, देवराज और गोकुल चंद ने प्रशासन से मांग की कि बिहाली से शाक्टी तक के स्थानीय देवी-देवताओं के लिए टनल के किनारे से रास्ता बनाया जाए। संवाद