न्यूली (कुल्लू)। बच्चों को घर-घर पोलियो दवा पिलाने में मैल गांव की आशा वर्कर चिंता देवी ने कमाल का जज्बा दिखाया है। नौ घंटे चढ़ाई चढ़कर और तीन किलोमीटर 45 सेंटीमीटर बर्फ में चलकर दुर्गम गांव शाक्टी पहुंच कर बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई। आसपास के गांव शुगाड़ और मरोड़ में बच्चों को दवा पिलाई। तीनों गांवों में 24 बच्चों को दो बूंद जिंदगी की पिलाई गई।
सोमवार को अभियान पर निकलीं आशा वर्कर चिंता देवी का हौसला उनके पति बालक राम ने बढ़ाया। दोनों मैल गांव से सुबह छह बजे निकले थे। नौ घंटे चढ़ाई और बर्फ में चलकर करीब तीन बजे मरोड़ गांव पहुंचे। उसके बाद तीनों गांवों में कुल 24 बच्चों को दवा पिलाई गई। सोमवार को उन्हें शुगाड़ गांव में रुकना पड़ा।
आशावर्कर के पति बालक राम ने कहा कि चिंता देवी ने पहले दिन तीन मार्च को अपने बूथ में 51 और दूसरे दिन बर्फ के बीच शाक्टी, शुगाड़ और मरोड़ में 24 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर पवार ने कहा कि आशावर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर और स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने दायित्वों का बखूबी पालन किया है। इसी का नतीजा है कि कुल्लू में तय लक्ष्य को पूरा किया गया है।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गवां चुकी है जान
साल 2020 में सैंज घाटी के दुर्गम गांवों शाक्टी, मरोड़ में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने निकली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता की बर्फ में फिसलकर 300 फीट गहरी खाई में गिरने से मौके पर ही मौत हो गई थी। कुल्लू की गाड़ापारली पंचायत के बर्फीले और खड़ी चढ़ाई वाले रास्ते जानलेवा हैं। साल 2020 में हुए इस हादसे के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क नहीं हुआ है।