कुल्लू। आनी और निरमंड के छह देवी-देवताओं के रथ वापस मंदिर नहीं जाएंगे। इनके रथ एक साल के देवसदन में ही रहेंगे। देवरथों को अगले साल होने वाली दशहरा उत्सव के लिए सजाया जाएगा। देवलु इन देवी-देवताओं को मोहरे और छड़ी मंदिर ले जाएंगे। आनी के चार और निरंमड के देवता सप्तऋषि और देवी भुवनेश्वरी के रथ एक साल के लिए देवसदन में ही रहेंगे। देवलुओं को इसके बावजूद देव परंपरा का निर्वहन करना होगा। मोहरों को लेकर वापस जाने वाले देवलू वाहनों में सफर नहीं कर सकेंगे। नियमों के अनुसार रात होने पर पूजा करने के बाद उसी स्थान पर ठहराव भी करना होगा।
200 किलोमीटर दूर से आए देवी-देवताओं के रथों को पैदल इतनी दूर ले जाना देवलुओं के लिए आसान नहीं है। ऐसे देवी-देवताओं के इन रथों को देवसदन में रखा जाता है। देवी-देवता कारदार संघ के जिलाध्यक्ष जयचंद ठाकुर ने कहा कि 200 किलोमीटर तक देवरथों को उठाकर पैदल चलना देवलुओं के लिए आसान कार्य नहीं है। देवलु देवता के मुख्य मुख-मोहरे और छड़ी लेकर दशहरा उत्सव से मंदिरों को लौटते हैं। देव रथों को सुरक्षित देवसदन में ही रखा जाता है।