केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में बाढ़ की त्रासदी के बाद हालात सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है। उदयपुर और जाहलमा के बीच बीआरओ का बहाली कार्य धीमा चल रहा है। हालात ऐसे हैं कि बीआरओ के पास सड़कों को बहाल करने के लिए एक डोजर तक नहीं हैं। ऐसे में जेसीबी के मदद से सड़कों को बहाल करने का काम चल रहा है। हालांकि तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा पिछले तीन दिनों से बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन के साथ डटे हुए हैं।
रंगवे नाले को बहाल करने के बाद प्रशासन ने फिलहाल शांशा नाले में वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। जाहलमा नाले में अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। यहां फंसे हुए लोग जान जोखिम में डाल कर नाले को आरपार कर रहे हैं। इस दौरान कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों की सुविधा के लिए जाहलमा पंचायत के उपप्रधान रणजीत, बिट्टू बांस, बिमल और राजेंद्र यंगथगी ने नाले में अस्थायी पुलिया लगाने का प्रयास किया। लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण पुलिया नहीं लगा सके। ऐसे में लोग बिना किसी प्रशासनिक मदद के खुद ही जान जोखिम में डाल कर नाले को पार कर रहे हैं। मयाड़ घाटी के चंगुट और चुरपुुट में प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है। मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि पट्टन घाटी में फंसी गोभी और मटर की फसलों को स्पेन तार और पुलिया की मदद से निकाला जाएगा। शांशा नाले में पुलिया के साथ तार स्पेन लगाया जाएगा। शांशा और थिरोट के बीच अभी भी सैकड़ों लोग फंसे हैं। कई इलाकों में ग्रामीण इन फंसे लोगों के लिए खाने का इंतजाम कर रहे हैं। लाहौल-स्पीति एकता मंच के अध्यक्ष सुदर्शन जस्पा ने कहा कि आपदा के समय जिस गति से राहत कार्य होने चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। आपदा के तीसरे दिन बीआरओ ओर प्रशासन की टीम जाहलमा पहुंची है।