संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। कभी सदस्यता अभियान में प्रदेश भर में अव्वल रहने वाली बंजार भाजपा का कुनबा अब पदाधिकारियों से संभल नहीं रहा है। गुटबाजी के चलते विद्रोह की चिंगारी यहां भड़कने लगी है और कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने में पार्टी नेतृत्व विफल साबित हो रहा है।
2017 के विस चुनाव में सराजी नारे के दम पर सीट जितने वाले वर्तमान विधायक अब इसी नारे पर घिरते हुए नजर आ रहे हैं। बार-बार सराजी का अलाप अलापने से गैर सराजी मतदाता उनसे किनारा करने लगे हैं। बंजार विस क्षेत्र के 65 हजार मतदाताओं में से रूपी और बजौरा क्षेत्र के 30 हजार गैर सराजी मतदाता हैं। 2015 के पार्टी सदस्यता अभियान में पार्टी के पूर्व मंत्री खीमीराम शर्मा के नेतृत्व में 25 हजार लोगों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। यह आंकड़ा प्रदेश भर की सभी 68 विस क्षेत्र में सबसे ज्यादा था। 2017 के चुनाव में टिकट में बदलाव होने से वर्तमान विधायक सुरेंद्र शौरी ने सराजी नेतृत्व का नारा दिया और सीट जितने में भी कामयाब हो गए। तब से लेकर हर मंच में सराजवाद का गुणगान होता रहा। हाल ही में बंजार दौर पर आए सीएम जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने भी अपने भाषण में अधिकतर जोर सराज और सराजी नेतृत्व पर ही केंद्रित किया। इस पर रूपी और बजौरा क्षेत्र के मतदाता खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष भीमसेन शर्मा भी बंजार विस के रूपी क्षेत्र से ही संबंध रखते है। शीर्ष नेतृत्व के इस बर्ताव पर वह भी खामोश है। उनकी बैठकों में कार्यकर्ताओं की बढ़ती संख्या से बंजार भाजपा के वर्तमान पदाधिकारियों की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सिर्फ सराज की बात करने पर पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता महेश्वर सिंह ने भी सख्ती दिखाई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें मजबूरन अपनी जुबान खोलनी पड़ेगी। उधर, 2017 तक पूर्व मंत्री खीमीराम शर्मा के साथ काम करने वाली टीम पार्टी के सत्ता में आने के बाद से साइड लाइन है। उन्होंने न पार्टी छोड़ी है और न ही बैठकों में भाग ले रहे हैं। ऐसे में पार्टी यहां तीन धड़ों में बंटी हुई है। जिला भाजपा अध्यक्ष भीमसेन शर्मा ने कहा कि पार्टी एकजुट है। फिलहाल लोकसभा के उप चुनाव की तैयारियां चल रही है।