धर्मशाला। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स की मांगों को लेकर शुक्रवार को पूरे देश में एक दिवसीय हड़ताल की गई। इसमें राज्य कमेटी के आह्वान पर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ जिला कांगड़ा में सीटू से संबंधित सभी बाल विकास परियोजनाओं में आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर हड़ताल पर रहीं। जिले के सभी केंद्रों को बंद रखकर अपनी मांगों के समर्थन में आंगनबाड़ी कर्मियों ने धर्मशाला में विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से उनकी मांगों के प्रति संवेदनहीन रवैया अपनाए हुए हैं। 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन ने आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर की सेवा शर्तों को बेहतर बनाने के लिए जो सिफारिशें की हैं, उन्हें सरकार लागू नहीं कर रही। उन्हें आईसीडीएस विभाग को निजीकरण की ओर धकेलने पर केंद्र व प्रदेश सरकार आमादा हैं, जिससे आने वाले दिनों में इनके रोजगार पर छंटनी की तलवार लटक सकती है। सरकार के आंगनबाड़ी कर्मी विरोधी रवैये को देखते हुए स्पष्ट हो जाता है कि कोरोना काल में आंगनबाड़ी कर्मियों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने जो कुछ भी टीवी पर कहा था, उनकी नीतियां उससे उलट हैं। सरकार की कथनी और करनी के अंतर को लेकर महिला कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है।
इस दौरान कृष्णा पटियाल, लज्या ठाकुर, किरण, सुदेश, रीना, नंदिनी, बीना, रंजना, मीना शर्मा, ज्वाला, संजना, पम्मी, अनीता, संतोष, शमा, मनोरमा आदि ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर उनकी मांगों को पूरा करने की आवाज बुलंद की है।