धर्मशाला। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान धर्मशाला के विभागों ने नेताओं की खुशामदी के लिए किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी। सरकार के सामने अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए विभाग कुछ दिन के लिए दुरुस्त तो हुआ लेकिन क्षेत्र से सरकार के जाते ही विभाग की नाकामी सामने आने लग पड़ी है।
नगर निगम के वार्ड नंबर छह कोतवाली बाजार में विधानसभा सत्र के दौरान पानी की किल्लत को दूर किया गया, लेकिन अब फिर से समस्या ज्यों की त्यों ही हो गई है। रविवार को संवाददाता ने वार्ड नंबर छह का दौरा किया। इस दौरान कोतवाली बाजार के लोगों ने विभाग को लेकर जमकर रोष व्यक्त किया। संवाददाता से बात होने पर लोगों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कुछ इस तरह सवाल उठाए।
विभाग की ओर से पानी को लेकर कोई समस्या नहीं : सरवण
जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता सरवण ठाकुर ने बताया कि विभाग की ओर से पानी को लेकर ऐसी कोई समस्या नहीं है। अगर इस क्षेत्र में विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर कुछ समस्या होगी तो ध्यान दिया जाएगा।
विधानसभा सत्र खत्म होते ही पानी गुम : अमरीश
वार्ड नंबर-6 कोतवाली बाजार के अमरीश ढींगरा ने बताया कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पानी बिल्कुल ठीक चल रहा था लेकिन अब फिर से पानी में वही दिक्कत आ गई जो पहले से आ रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे पानी की उपलब्धता विधानसभा के चलते करवाई गई थी। जैसे ही विधानसभा का सत्र खत्म हुआ पानी भी गुम हो गया।
नाम की है स्मार्ट सिटी धरातल पर लोग परेशान: नरेंद्र
व्यापार मंडल कोतवाली बाजार के प्रधान नरेंद्र सिंह जम्वाल ने बताया कि धर्मशाला को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया गया है। स्मार्ट सिटी नाम देने के दौरान 24 घंटे पानी देने की घोषणा की गई थी, लेकिन धरातल पर आम आदमी को दो घंटे पानी नहीं मिल रहा। धर्मशाला मात्र नाम की ही स्मार्ट सिटी है।
हफ्ते में दो तीन बार आ रहा पानी : कुशमिंद्र
गुरुद्वारा रोड के व्यापारी कुशमिंद्र धवन ने बताया कि इस हफ्ते मेें एक बार पानी आने के बाद पानी दो-तीन दिन के लिए गुम हो गया। अब आलम यह है कि पानी हफ्ते में दो या तीन बार मात्र कुछ समय के लिए आ रहा है।
रात को 12 बजे तक जाग कर करना पड़ रहा पानी का इंतजार: बबलू
कोतवाली बाजार के होटल व्यापारी बबलू ठाकुर ने बताया कि पानी आने का समय ही सही नहीं है। विभाग की ओर से पानी अपनी मर्जी से छोड़ा जा रहा है। कभी सुबह, कभी शाम तो कभी रात को 12 बजे पानी छोड़ा जाता है। पानी के इंतजार के लिए कभी तो रात से सुबह जागते हुए हो जाती है।