फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

100 से अधिक युवाओं ने करवाया मुंडन, शाम को मिली एफसीए की मंजूरी की कॉपी

विज्ञापन
विज्ञापन
धर्मशाला। बरनेट-घेरा सड़क को वन विभाग से मंजूरी न मिलने से खफा आमरण अनशन पर बैठे युवाओं ने सोमवार को सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते हुए अपने सिर मुंडवा लिए। इस दौरान क्षेत्र के 100 से अधिक युवाओं ने जिलाधीश कार्यालय परिसर में ही बाल उतरवाए।
विज्ञापन

वहीं आमरण अनशन पर बैठे और सड़क बनाने की मांग कर रहे लोगों ने जिला प्रशासन को मंगलवार सायं पांच बजे तक मंजूरी की काफी न मिलने पर आत्मदाह करने तक की चेतावनी दी थी, लेकिन सोमवार शाम को साढ़े सात बजे एसडीएम धर्मशाला ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी सड़क की मंजूरी की कॉपी देते हुए आमरण अनशन तुड़वाया।
इसके बाद ग्रामीणों ने बरनेट से घेरा सड़क की वन विभाग से मंजूरी मिलने के बाद प्रशासन का आभार प्रकट करते हुए अपना अनशन वापस ले लिया।
गौरतलब है कि सड़क सुविधा न मिलने के कारण धारकंड़ी क्षेत्र की पंचायतों के लोगों ने जिलाधीश कार्यालय में रैली निकालने के बाद 12 अगस्त से क्रमिक अनशन शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन को सड़क बनाने की मंजूरी प्रदान करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था, जो 15 अगस्त को समाप्त हो गया था और 15 अगस्त सायं से ग्रामीणों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने अनशन पर बैठे ग्रामीणों को सायं चार बजे तक सड़क मंजूरी के लिए इंतजार करने को कहा, लेकिन जब चार बजे तक ग्रामीणों को सड़क की मंजूरी के संदर्भ में कोई पुख्ता जानकारी न मिली तो उन्होंने खफा होकर बाल कटवाने शुरू कर दिए । इस दौरान क्षेत्र के करीब 100 से अधिक युवाओं ने सिर मुंडवा लिए। वहीं इस दौरान ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्र शाहपुर के कांग्रेस और बीजेपी से संबंधित नेताओं के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। वहीं, सायं साढ़े चार बजे एसडीएम धर्मशाला डॉ. हरीश गज्जू ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को देहरादून से बनरेट से घेरा सड़क की एफसीए मंजूरी मिलने की जानकारी दी और मंगलवार को शाम तक इसकी कॉपी आने की बात भी कही। इस दौरान ग्रामीणों बनरेट-घेरा सड़क की वन विभाग की मंजूरी मिलने की खुशी में प्रशासन जिंदाबाद के नारे भी लगाए, लेकिन इसकी कॉपी मिलने के बाद ही आमरण अनशन तोड़ने के राजी हुए थे। शाम को वन विभाग की मंजूरी की कापी मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन वापस ले लिया।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भी जताया आक्रोश
आमरण अनशन पर बैठे धारकंडी के ग्रामीणों ने एसडीएम डॉ. हरीश गज्जू और एएसपी पुनीत रघु के समक्ष स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर गुस्सा फूटा। उन्होंने विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि 15 अगस्त 12 बजे से शुरू हुए आमरण अनशन को 24 घंटे से अधिक समय बीत गया है पर अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां नहीं पहुंची है।
मंजूरी की कॉपी देकर समाप्त किया अनशन: एसडीएम
इस संदभ में उपमंडलाधिकारी धर्मशाला डॉ. हरीश गज्जू ने कहा कि धारकंडी क्षेत्र को जाने वाले सड़क मार्ग की हालत खस्ता है। इसे दोबारा बनाने में कम से कम दो से तीन माह लगेंगे। इसके अलावा बनरेट-घेरा सड़क के निर्माण के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की मंजूरी की कॉपी देकर ग्रामीणों को अनशन तुड़वा दिया है।
धारकंडी से आने में सुविधा होगी: अर्जुन सिंह
रावा खड़ीबेही के प्रधान अर्जुन सिंह ने बरनेट से घेरा सड़क की एफसीए की मंजूरी मिलने पर प्रशासन का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से अब लोगों को अन्य सड़क लोगों को जिला मुख्यालय से जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने इसकी मंजूरी दिलाने में ग्रामीणों को सहयोग किया है। अब इस सड़क के बनने से लोगों की समस्याओं हल हो जाएगी।
यह धारकंडी के लोगों की जीत है: रवि
धारकंडी क्षेत्र के युवा रवि कुमार ने कहा कि वे किसी खुशी में मुंडन नही करवा रहे हैं। सरकार के ढुलमुल रवैय के कारण आज सैकड़ों युवाओं को मुंडन करवाने पर मजबूर होना पड़ा है। सरकार पिछले 17 सालों से बनरेट से घेरा तक डेढ़ किलोमीटर सड़क नहीं बना पाई है। लोगों के आंदोलन के बाद इसकी मंजूरी मिली है यह धारकड़ी क्षेत्र के लोगों की जीत है।
मंजूरी दिलाने के लिए प्रशासन का आभार जताया : जोगिंद्र सिंह
धारकंडी के युवाओं के साथ अनशन पर बैठे भड़ियाड़ा वार्ड के जिला परिषद सदस्य जोगिंद्र सिंह पंकू ने कहा कि सड़क की मांग को लेकर आश्वासनों से तंग आकर धारकंडी क्षेत्र के 100 से अधिक युवाओं ने मुंडन करवा लिया था। वहीं शाम को एसडीएम धर्मशाला द्वारा बरनेट से घेरा सड़क की मंजूरी मिलने के बाद अनशन समाप्त कर दिया गया। मंजूरी मिलने पर उन्होंने जिला प्रशासन और एसडीएम धर्मशाला का आभार प्रकट करते हुए कहा कि लोगों की समस्याओं को समझते हुए उनके प्रयासों से 17 साल बाद बनरेट से घेरा सड़क बन पाएगी।
क्यों आई अनशन की नौबत
12 जुलाई को भारी बारिश के कारण धारकंडी क्षेत्र की आधा दर्जन के अधिक पंचायतों के करीब 6 हजार से अधिक आबादी की जिला मुख्यालय से जोड़ने वाल घेरा सड़क कैंट नाला के पास करीब सौ मीटर बह गई थी। सड़क के बहने से क्षेत्र के लोगों को सभी प्रकार की समस्याओं को सामना करना पड़ रहा था और लोगों को करीब 15 से 20 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ रहा था और बीमार और गर्भवती महिलाओं को पालकी में बैठकर लाना पड़ रहा था। इस सड़क के पुन: निर्माण के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा कोई कदम न होने के चलते क्षेत्र के ग्रामीणों ने 24 दिन बाद 4 अगस्त को गांधी वाटिका धर्मशाला से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकालकर प्रशासन को सात दिन को अल्टीमेटम दिया था। साथ ही उन्होंने पिछले 17 सालों ने नहीं बन पाई बरनेट से घेरा की डेढ़ किलोमीटर सड़क का बनाने की आवाज उठाई थी। ताकि इस सड़क के बनने से धारकंडी क्षेत्र के लोगों की समस्या का हल हो जाएगा। बनरेट से घेरा सड़क की वन विभाग की मंजूरी न मिलने के चलते इसका निर्माण नहीं हो पाया था। ग्रामीण के अल्टीमेटम के बाद 6 अगस्त को एसडीएम धर्मशाला हरीश गज्जू की अध्यक्षता में वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र को दौरा किया था। सात दिन के अल्टीमेटम के 12 अगस्त को ग्रामीणों ने रैली निकालकर क्रमिक अनशन शुरू कर दिया था।

धर्मशाला के उपायुक्त कार्यालय के बाहर सड़क की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे धारकंडी क्षेत्र के य- फोटो : Kangra

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें