श्री गोबिंद जीवन आश्रम में लोगो को प्रवचन सुनाते संत और बीच मे स्वामी प्रेमानंद। -संवाद
पालमपुर (कांगड़ा)। श्री गोबिंद जीवन आश्रम परौर में 16 दिन पहले विलीन हुए स्वामी प्रकाशानंद महाराज की शनिवार को षोडशी (सोलहवीं) मनाई गई। इसमें देशभर से साधु-संत पहुंचे। साथ ही स्वामी प्रेमानंद महाराज को आश्रम का उत्तराधिरकारी घोषित किया गया। आश्रम में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
हॉल में जगह न होने पर लोगों ने बाहर धूप में बैठकर भी साधु-संतों के प्रवचन सुने। बताया जाता है कि स्वामी प्रकाशानंद साल 1982 में परौर आए थे। उसके बाद पंजाब से जुड़े उनके भक्तों ने उनसे परौर में ही रहने का आग्रह किया था। लिहाजा, 1983 में स्वामी प्रकाशानंद महाराज स्थायी रूप से परौर में आ गए थे। जहां पर उन्होंने दो कमरों से आश्रम शुरू किया था, जो आज एक भव्य रूप में दिखाई देता है। आज पूरे देश से हजारों लोग आश्रम से जुड़े हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समेत कई नेता व अधिकारियों ने परौर आश्रम पहुंचकर स्वामी प्रकाशानंद महाराज का आशीर्वाद लिया था। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए स्वामी प्रकाशानंद महाराज की अगुवाई में आश्रम में साल 2020-21 में संस्कृत महाविद्यालय की नींव रखी गई थी।
इस मौके पर मध्यप्रदेश के महामंडलेश्वर स्वामी सिंह प्रखानंद महाराज, मोगा (पंजाब) के महामंडलेश्वर आत्मानंद महाराज, सुंदरनगर के स्वामी विशुद्धानंद महाराज, आश्रम संचालक रमेश ठाकुर, भरत राजगुरु, प्रदीप ठाकुर, अमर सिंह ठाकुर, कैलाश शास्त्री आदि कई लोग मौजूद रहे।
स्वामी के बताए मार्ग चलूंगा: स्वामी प्रेमानंद
स्वामी प्रेमानंद महाराज ने कहा कि वह हमेशा गुरु प्रकाशानंद के बताए मार्ग पर ही चले हैं और आगे भी उनके मार्ग पर ही चलेंगे। कहा कि प्रभु नाम के प्रचार व प्रसार के लिए जीवनभर काम करता रहूंगा।