सात सदस्यीय टीम दो दिन तक करेगी विश्वविद्यालय में परियोजनाओं का मूल्यांकन
समन्वित अनुसंधान परियोजना’ और ‘जैविक खेती पर नेटवर्क कार्यक्रम’ की समीक्षा करेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में ‘एकीकृत कृषि प्रणाली पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना’ और ‘जैविक खेती पर अखिल भारतीय नेटवर्क कार्यक्रम’ की समीक्षा के लिए क्विक्वीनियल रिव्यू टीम (क्यूआरटी) की दो दिवसीय बैठक शनिवार से आरंभ हो गई है।
पूर्व डीडीजी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के पूर्व कुलपति डाॅ. अरविंद कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पालमपुर विश्वविद्यालय, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जम्मू गोविंद बल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर एवं आईसीएआर-भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके वत्स ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्पादन को बनाए रखने और दीर्घकालिक आधार पर पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल के विकास पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से अत्यधिक उत्पादक कृषि प्रणाली घटकों के साथ-साथ जैव-प्रबलीकरण दृष्टिकोण को अपनाने के माध्यम से देश की बड़ी आबादी की पोषण सुरक्षा पर जोर दिया।
इस अवसर पर नौणी, सोलन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डाॅ. वीएस ठाकुर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डाॅ. एके सिंह पूर्व एडीजी, मानव संसाधन विकास डाॅ. कुसुमाकर शर्मा पूर्व अतिरिक्त आयुक्त, आईएनएम डिवीजन, कृषि विभाग डाॅ. वंदना द्विवेदी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार) आईसीएआर-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. सुनील कुमार एनपीआई, एआईएनपी-ओएफ, आईसीएआर-आईआईएफएसआर, पीसी (आईएफएस) डाॅ. एन रविशंकर सदस्य सचिव, क्यूआरटी डाॅ. राघवेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली के तहत गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान में सुधार के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। विभिन्न राज्यों के वैज्ञानिकों ने अपने-अपने केंद्रों की पिछले पांच वर्षों की अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के साथ-साथ भविष्य की कार्य प्राथमिकताओं को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रसार निदेशक डाॅ. नवीन कुमार और सह निदेशक अनुसंधान डाॅ. एमसी राणा भी मौजूद रहे।