धर्मशाला। स्मार्ट शहर धर्मशाला को नगर निगम का दर्जा मिले पांच साल से भी ऊपर का समय हो चुका है। इसके बावजूद नगर निगम की चर्चा कूड़ेदानों की संभाल, कूड़ा एकत्रीकरण और शौचालयों के निर्माण से आगे नहीं बढ़ पाई है।
मंगलवार को जब नगर निगम धर्मशाला की मासिक जनरल हाउस की बैठक आयोजित की गई तो ज्यादातर समय स्वच्छता के मुद्दे पर ही केंद्रित रहा। वार्ड 13 से पार्षद सविता कार्की ने कहा कि शहर के कई बाजारों में अब तक शौचालय की सुविधा नहीं दे पाए हैं।
ऐसे में अब प्राथमिकता के आधार पर हर वार्ड में सार्वजनिक स्थानों खासकर बाजारों में शौचालय का निर्माण किया जाना चाहिए। बैठक में एक एजेंडा ही स्वच्छता को लेकर सैनिटाइजेशन समिति के अनुमोदन को लेकर पेश किया गया।
इसमें अब हर माह दो दिन पार्षद स्थानीय लोगों को साथ लेकर सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे। वहीं, सदन में सवाल उठा कि विधानसभा चुनावों से पहले आनन-फानन में जो अंडर ग्राउंड कूड़ेदान स्थापित किए गए थे, उनकी संभाल में ही कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं। स्वच्छता से जुड़ा अगला मुद्दा था कि डोर-टू-डोर कचरा इकट्ठा करने वाले कर्मचारी घर-घर जाकर कचरा नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोग दुखी होकर घर से कचरा उठाने के लिए अब मासिक शुल्क भी नहीं दे रहे हैं। इस तरह से बैठक का करीब 40 फीसदी समय सिर्फ स्मार्ट शहर की पर ही चला गया। इसके अलावा बैठक में दुकानदारों ने कोविड काल में अब तक 20 लाख रुपये का बकाया न मिलने के विषय पर चर्चा की गई। वहीं, नगर निगम क्षेत्र में नालों पर अतिक्रमण कर डाली गई स्लैब और पार्किंग को तोड़ने की कार्रवाई शुरू किए जाने के फैसले पर सहमति जताई।
वित्त समिति तय करेगी नगर निगम की दुकानों का किराया
बैठक में पहला एजेंडा नगर निगम की दुकानों और अन्य परिसंपत्तियों के किराये और धरोहर राशि के निर्धारण को लेकर पेश किया गया। इसमें अधिकारियों ने 2012 को आधार मानते हुए उसी वर्ष के अनुसार किराया तय करने का सुझाव दिया। इस पर मेयर ओंकार नैहरिया और अन्य पार्षदों ने असहमति जताते हुए कहा कि दुकानों को आठ साल पुराने किराये पर दिलवाना विवेकपूर्ण फैसला नहीं होगा। ऐसे में सदन के अनुमोदन से पहले यह मामला अब वित्त समिति के पास भेजा जाएगा। उसके बाद ही सदन किराये पर अंतिम मुहर लगाएगा।
समय पर एनओसी न मिलने से लोग परेशान : रजनी
पूर्व मेयर और वार्ड 15 से पार्षद रजनी व्यास ने लोगों को लंबे समय से एनओसी न मिलने का मुद्दा उठाया। पार्षद रजनी ने कहा कि इसी महीने उनसे कम से कम 20 लोगों ने संपर्क कर एनओसी न मिलने की समस्या बताई है। उन्होंने बताया कि इन लोगों में से कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने पिछले 9-10 महीनों से एनओसी के लिए आवेदन किया है। इनमें से कुछ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान के लिए भी शामिल हैं। यह निर्माण तमाम नियमों का पालन कर और सभी जरूरी दस्तावेज जमा करवाकर किया गया है। इसके बावजूद समय पर एनओसी न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
पार्षद को ही पसंद नहीं आई चयनित वार्ड समिति
हाल ही में नगर निगम की वार्ड समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों का चयन वार्ड पार्षद की अध्यक्षता में किया गया था। इसके बावजूद वार्ड सात सचिवालय की पार्षद संतोष शर्मा ने अपने वार्ड में समिति के चयन पर ऐतराज जताया। सदन में उन्होंने कहा कि उन्हें समिति के सदस्य पसंद नहीं हैं। ऐसे में उन्हें बदल दिया जाए। ऐसे में आयुक्त ने बताया कि इसके लिए छह माह बाद समीक्षा बैठक का प्रावधान है। उसी में सदस्यों में बदलाव किया जा सकता है।
दिहाड़ीदारों को महीनों से नहीं मिली दिहाड़ी
सदन में वार्ड तक 12,13 और 15 के पार्षद ने कई महीनों बाद भी मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना के तहत की गई मजदूरी की दिहाड़ी न मिलने का मामला उठाया। पार्षद सविता कार्की और रजनी व्यास ने कहा कि जरूरत के समय धर्मशाला की महिलाओं से काम तो ले लिया गया, लेकिन अब तक उनकी दिहाड़ी का भुगतान नहीं किया गया है। गरीबों की जरूरत को समझते हुए इन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द इनका बकाया भुगतान करने का कहा।