बैजनाथ (कांगड़ा)। पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी में सुरक्षा नियमों की अनदेखी मौत के मामलों को न्योता दे रही है। रविवार दोपहर को टेंडम उड़ान के दौरान हुई मौत के मामले में भी सुरक्षा नियमों में चूक की बात सामने आ रही है।
घटना में पर्यटक की टांगों के बीच के क्लिप (हारनेस) के खुलने की बात सामने आ रही है। उड़ान के दौरान पायलट के साथ बैठे व्यक्ति की टांगों के मध्य क्लिप लगाया जाता है और इस क्लिप के सहारे ही पर्यटक पायलट के साथ सुरक्षित रूप में बैठा रहता है ।
दुर्घटना में यह बात भी सामने आ रही है कि हो सकता है कि उड़ान से पूर्व पायलट पर्यटक को क्लिप लगाना ही भूल गया हो। घाटी में वर्तमान में 300 के करीब पायलट पर्यटन विभाग से पंजीकृत हैं, लेकिन अधिकांश पायलटों के पास किराये के पुराने पैराग्लाइडर मौजूद हैं। पायलट पर्यटन विभाग से पंजीकृत तो हो जाते हैं, लेकिन किराये के इन पुराने पैराग्लाइडर के सहारे ही उड़ाने भर रहे हैं, वहीं कुछ पायलटों के नशे करने की बातें भी सामने आ रही हैं और ये पायलट नशे में ही पर्यटकों को उड़ान भरवा देते हैं। कई मौकों पर एक पायलट एक दिन में पांच से छह उड़ानें भरता है और जल्दबाजी में भी सुरक्षा नियमों में चूक होना स्वाभाविक रहता है। इन पायलटों की नियमित रूप से जांच के लिए घाटी में पर्यटन विभाग और पुलिस का एक भी प्रतिनिधि नहीं है। मात्र साडा के एक सुपरवाइजर के सहारे पैराग्लाइडिंग और साडा के सभी कार्य चले हुए हैं। बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के निदेशक अनुराग शर्मा का कहना है कि पायलटों और उनके ग्लाइडर की पूरी जांच के बाद ही उन्हें उड़ान भरने की अनुमति दी जाना आवश्यक है। वहीं एसडीएम सलीम आजम ने बताया कि पुलिस की रिपोर्ट के बाद मामले के बाद ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
टेंडम उड़ान में तीन लोग गंवा चुके हैं अपनी जान
सुरक्षा नियमों के चलते घाटी में टेंडम उड़ानों के दौरान अब तक तीन लोग अपनी जान गवा चुके हैं। सबसे पहले 2004 में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में तैनात चंडीगढ़ के राजीव अग्रवाल इसी प्रकार पैराग्लाइडर से गिर जाने के कारण मौत की आगोश में समा गए थे। वहीं, 2019 में बरोट का स्थानीय पायलट प्रेक्टिस के दौरान अचानक नीचे गिर जाने से अपनी जान गंवा बैठा था। टेंडम उड़ान के दौरान हुई यह तीसरी मौत है।