धर्मशाला। जुलाई माह में मांझी खड्ड में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई कूहल का प्रशासन चार माह बाद भी मरम्मत नहीं करवा पाया है। इसके चलते करीब नौ पंचायतों के 3500 किसानों की आर्थिकी पर संकट गहरा गया है।
इस कूहल की मरम्मत के लिए किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को डीसी कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल से मिला। बरसात के मौसम में भारी बारिश के कारण मांझी खड्ड में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे।
तब मांझी खड्ड से सिंचाई का जल उपलब्ध करवाने वाली कूहल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके चलते इच्छी, पटोला, कंद्रेहड़, बगली, घणा, सौहड़ा, अब्दुल्लापुर, जमानाबाद सहित नौ पंचायतों के करीब 3500 किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल पा रहा है। प्रतिनिधिमंडल के साथ आए किसान बलवीर सैणी, निशा चौधरी, राम स्वरूप, जगदीश चंद आदि ने बताया कि इन किसानों की जमीनों को सिंचाई का पानी न मिलने से जमीन बंजर होने को आ गई है। उन्होंने बताया कि यह जमीन खेतीबाड़ी के लिहाज से बेहद उपजाऊ है। यहां बड़े पैमाने पर सब्जी और गेहूं का उत्पादन होता है। इसके सहारे करीब 3500 किसानों का परिवार चलता है। कूहल टूटने से इन परिवारों की आर्थिकी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि अधिकारी कई बार इस कूहल का मुआयना करने के लिए मौके पर आते रहे हैं, लेकिन अब तक मरम्मत कार्य में कोई प्रगति देखने को नहीं मिल रही। डीसी से मिलने आए किसानों ने गुहार लगाई कि जल्द से जल्द इस कूहल की मरम्मत करवाई जाए, ताकि प्रभावित किसान बिजाई कर सकें।
बीडीओ को दिए एस्टिमेट बनाने के निर्देश: डीसी
डीसी कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि संबंधित बीडीओ को कूहल के मरम्मत कार्य का एस्टिमेट बनाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एस्टिमेट बनने के बाद शीघ्र ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।