कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने सरकार से पूछा कि सब्सिडी को बंद करने का फैसले क्यों लिया गया। अदालत ने राज्य सरकार सहित बिजली बोर्ड को भी अपना जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी। वहीं, सरकार व बिजली बोर्ड की ओर से दलीलें दी गईं कि सरकार ने टैरिफ में कोई संशोधन नहीं किया है। सिर्फ उद्योगों को सरकार की ओर से मिलने वाली 1 रुपये की सब्सिडी को बंद किया है। उद्योगों का विवाद जारी किए गए बिजली के बिल से है। सरकार ने रेगुलेटरी कमीशन को सब्सिडी को वापस लेने पर अधिसूचना दी थी।
अधिसूचना के बाद ही आयोग ने सब्सिडी को वापस लेने का फैसला लिया था। बता दें कि एकल न्यायाधीश ने राज्य सरकार की ओर से उद्योगों को 1 रुपये मिलने वाली सब्सिडी को बंद करने के निर्णय को सही ठहराया था। सरकार ने उद्योगों को 1 रुपये मिलने वाली सब्सिडी को बंद कर दिया था। सरकार के इस फैसले से प्रदेश में कार्यरत करीब 200 कंपनियां प्रभावित हुई हैं।