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रिपोर्ट में खुलासा: डिजिटल भुगतान में हिमाचल की छलांग, बिलासपुर सबसे आगे, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

Wed, 23 Sep 2026 06:30 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला।

सार

 यूपीआई पेमेंट को लेकर लागू होने जा रहे नए नियमों के बीच हिमाचल प्रदेश की नई तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में डिजिटल भुगतान अब शहरों तक सीमित सुविधा नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है।
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डिजिटल भुगतान में हिमाचल की छलांग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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देशभर में 15 अक्तूबर से यूपीआई पेमेंट को लेकर लागू होने जा रहे नए नियमों के बीच हिमाचल प्रदेश की नई तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में डिजिटल भुगतान अब शहरों तक सीमित सुविधा नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर टैक्सी, किराना स्टोर, सब्जी विक्रेता और सरकारी सेवाओं तक यूपीआई आधारित भुगतान ने नकदी पर निर्भरता को तेजी से कम किया है। इसी बदलाव की झलक बैंकिंग इको सिस्टम के ताजा जिलावार आंकड़ों में भी दिखाई देती है। प्रदेश के 69.82 लाख पात्र बचत खातों में से 62.27 लाख खाते कम से कम एक डिजिटल भुगतान माध्यम डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई या एईपीएस से जुड़े हुए हैं। यानी 89.19 फीसदी खाताधारक अब डिजिटल भुगतान प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं।

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93.34 फीसदी खाताधारक महिलाएं डिजिटल लेनदेन कर रही
रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पक्ष महिलाओं की बढ़ती डिजिटल भागीदारी है। प्रदेश की 93.34 फीसदी खाताधारक महिलाएं डिजिटल लेनदेन कर रही हैं। सभी जिलों में महिलाओं के खातों का डिजिटल उपयोग पुरुषों से अधिक दर्ज किया गया है। स्वयं सहायता समूहों, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी), सामाजिक सुरक्षा पेंशन और सरकारी योजनाओं की राशि सीधे खातों में पहुंचने से महिलाओं में मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है। देश में यूपीआई लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। गांवों तक इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के साथ प्रदेश में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से फैल रहा है।

बिलासपुर पूरे प्रदेश में सबसे आगे
डिजिटल भुगतान कवरेज के मामले में बिलासपुर पूरे प्रदेश में सबसे आगे निकलकर सामने आया है। जिले के 94.89 फीसदी पात्र बचत खाते किसी न किसी डिजिटल भुगतान माध्यम से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि जिले में बैंकिंग सेवाओं और डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों की स्वीकार्यता सबसे अधिक है। बिलासपुर के बाद हमीरपुर, ऊना और कांगड़ा जैसे जिलों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। इन जिलों में बड़ी संख्या में उपभोक्ता मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और कार्ड आधारित भुगतान सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रदेश के औद्योगिक जिले के रूप में पहचान रखने वाला सोलन डिजिटल भुगतान कवरेज में सबसे पीछे है। यहां केवल 80.62 फीसदी पात्र खाते ही किसी डिजिटल भुगतान माध्यम से जुड़े पाए गए।

यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग ने बदली तस्वीर
डिजिटल भुगतान की असली ताकत यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग बनकर उभरी है। प्रदेश में 51.51 लाख खाते मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और यूएसएसडी प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। इसका अर्थ है कि हर चार में से लगभग तीन खाताधारक अब मोबाइल फोन के जरिये भुगतान या बैंकिंग सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। यूपीआई ने छोटे भुगतान को भी आसान बना दिया है। पहले जहां 20 या 50 रुपये के लेनदेन के लिए नकदी की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब दुकानों, टैक्सियों, ढाबों और स्थानीय बाजारों में क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करना सामान्य बात हो गई है।
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जिलों के बीच बड़ा डिजिटल अंतर
आंकड़े यह भी बताते हैं कि प्रदेश में डिजिटल बैंकिंग की पहुंच समान नहीं है। शिमला और सिरमौर में भी 90 फीसदी से कम खाते डिजिटल भुगतान माध्यमों से जुड़े हैं, जबकि बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जैसे जिले 90 फीसदी से ऊपर पहुंच चुके हैं। भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में नेटवर्क और डिजिटल साक्षरता की वजह से प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है। हालांकि बैंकिंग संस्थान और प्रशासन इन क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं।
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