हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के संजौली स्थित बंगाला कालोनी में वन भूमि और सार्वजनिक रास्तों पर हो रहे अवैध कब्जों और अतिक्रमण निर्माणों पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा के खंडपीठ ने शिमला के जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव को तुरंत घटनास्थल का दौरा करने और तस्वीरों के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इस जांच में शिमला नगर निगम और उपायुक्त के अधिकारी को सचिव के साथ सहयोग करने को कहा है। उपायुक्त को अधिकार दिया गया है कि वह संबंधित सब डिवीजन मजिस्ट्रेट को उसी दिन घटनास्थल पर भेजकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें और अदालत में प्रस्तुत करें। अदालत ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्राधिकारी नोटिस जारी करने के बाद कानून के अनुसार अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
अदालत ने एक आवेदन के आधार पर इस मामले में संज्ञान लिया है। आवेदन में बंगाला कालोनी जो दुर्गा गैस स्टोर के पास और एसपीएम स्कूल से सटे निर्माणाधीन मैदान के नीचे स्थित है, में अतिक्रमण और अवैध निर्माण का उल्लेख किया गया है। आरोप लगाए गए हैं कि वन और सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण किया गया है। हरे भरे क्षेत्र को कंक्रीट से ढकना, देवदार के पेड़ों को नुकसान पहुंचाना, वन भूमि पर कूड़ा जलना, सार्वजनिक फुटपाथों और सीढ़ियों पर अतिक्रमण और उन्हें अवरुद्ध करना, घरेलू अपशिष्ट जल को सार्वजनिक रास्तों और वन ढलानों पर बहाना, बिना पंजीकरण के मुर्गियों के सेट बनाकर वन भूमि पर अवैध कब्जा करना शामिल है।