मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकारी क्षेत्र में नियुक्तियों के लिए राज्य सरकार गुजरात मॉडल का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को धीरे-धीरे कम कर रही है, जिससे कि युवाओं का शोषण न हो। सरकार एक ऐसी नीति लाने जा रही है कि जो ई-व्हीकल को बदलना चाहते हैं, वह इसे बदल पाएंगे। सीएम ने यह बात वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करने के बाद पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
सुक्खू ने कहा कि राज्य आत्मनिर्भर होगा। जनता का पैसा जनता में बांटा जाएगा। राज्य की संपदा कुछ लोगों के हाथों में है। भ्रष्टाचार के दरवाजे बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी योजना एक साल के लिए नहीं लाई जाती। उन्हें चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत से वर्गों ने मानदेय बढ़ोतरी को नहीं कहा था, मगर सरकार ने बजट में उनका ध्यान रखा।
भाजपा को आर्थिक कुप्रबंधन पर घेरा
मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण के शुरू में आर्थिक कुप्रबंधन के आरोप लगाते हुए पिछली सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इससे वर्तमान सरकार के सामने कई प्रकार की चुनौतियां आईं। हिमाचल पर भारी आपदा आई, न तो उसका हिस्सा मिला और न ही बीबीएमबी ने ही हिस्सा दिया। एनपीएस शेयर के रूप में भी राज्य सरकार और सरकारी कर्मचारियों का लगभग 9 हजार करोड़ रुपये का फंड केंद्र से लेना शेष है। वैट के स्थान पर जीएसटी लागू करके और जीएसटी मुआवजे के रूप में राज्य सरकार को वर्ष 2023-24 तक कुल 9,478 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ।
उन्होंने कहा कि सदन में नेता प्रतिपक्ष इस बात से अवगत हैं कि पंद्रहवें वित्तायोग की सिफारिशों के कारण 2021-2022 से 2025-26 के दौरान राजस्व घाटा अनुपान में पिछले साल से कम गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि 2021-22 में यह ग्रांट 10,949 करोड़ रुपये थी। यह 2025-26 में मात्र 3,257 करोड़ रुपये और राजस्व घाटा अनुदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।