कोर्ट ने अधिनियम और नियमों का अवलोकन करने के बाद याचिकाकर्ता की दलीलों में प्रथम दृष्टया मेरिट पाई। अदालत ने निर्देश दिया कि सरकारी और निजी संस्थानों में प्री नर्सरी कक्षाओं के दाखिले अधिनियम और रूल्स 2026 के प्रावधानों के अनुसार ही किए जाएं। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रदेश में कई संस्थान आवश्यक पंजीकरण के बिना प्री नर्सरी कक्षाओं में दाखिले कर रहे हैं। यह 2017 के अधिनियम और 2026 के नियमों का उल्लंघन है। मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।