फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Himachal News: अब चूड़धार यात्रा के लिए नहीं चुकाना होगा शुल्क, स्थगित किया गया फैसला, नोटिफिकेशन जारी

Tue, 27 May 2025 04:51 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

Churdhar Yatra: हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल चूड़धार मंदिर में श्रद्धालुओं से प्रवेश शुल्क वसूलने के आदेश को हिमाचल प्रदेश वन विभाग (वन्यजीव विंग) ने तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। 
विज्ञापन
चूड़धार मंदिर। (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश वन विभाग के तहत वन्यजीव विंग के शिमला वन्यजीव मंडल ने चूड़धार वन्यजीव अभयारण्य में लगाए प्रवेश शुल्क को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह निर्णय विभिन्न धार्मिक संगठनों, स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों की आपत्तियों के मद्देनजर लिया गया है।
विज्ञापन


वन विभाग की ओर से 2 अप्रैल 2025 को जारी आदेश के तहत अभयारण्य में जाने वाले आगंतुकों से पर्यावरणीय संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुल्क वसूली का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इस कदम से स्थानीय समुदायों और श्रद्धालुओं में असंतोष फैल गया, विशेष रूप से चूड़धार मंदिर की पहुंच को लेकर जो अभयारण्य के भीतर स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।

विज्ञापन



ये भी पढ़ें- Himachal Weather: हिमाचल में एक सप्ताह तक जारी रहेगी बारिश, छह जिलों में दो दिन अंधड़-ओलावृष्टि का अलर्ट

डिप्टी कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, शिमला वन्यजीव मंडल की ओर से 27 मई 2025 को जारी नवीन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जब तक एक समग्र और पारदर्शी मॉडल तैयार नहीं हो जाता—जिसमें धार्मिक श्रद्धालुओं को छूट देने और अन्य आगंतुकों के लिए न्यायसंगत शुल्क निर्धारण सुनिश्चित किया जाएगा—तब तक पूर्व आदेश को स्थगित रखा जाएगा। यह निर्णय चूड़धार क्षेत्र में धार्मिक भावनाओं, स्थानीय जनभावनाओं और पारिस्थितिकी के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
विज्ञापन

बता दें कि चूड़धार, जो कि पूज्य शिरगुल देवता का घर है, उत्तराखंड के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर के हजारों लोगों के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखता है। स्थानीय हिमाचली श्रद्धालुओं के बाद यह चूड़धार आने वाले तीर्थयात्रियों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है। हाल ही में उत्तराखंड के त्यूनी से आए एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया था, जब उनसे 20 सदस्यों वाले परिवार के लिए 1,000 रुपये वसूले गए, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि हम यहां पिकनिक मनाने नहीं आए हैं। हम अपने देवता के दर्शन के लिए आए हैं। हमें अपनी आस्था के लिए टैक्स क्यों देना चाहिए? इसके बाद अब इस फैसले के बाद श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है। 

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें