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Himachal Apple Season: इस कंपनी ने शुरू की सेब खरीद, इतने रुपये प्रतिकिलो खरीदा जा रहा एलएमएस एप्पल

Wed, 04 Sep 2024 06:35 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

कोटखाई के गुम्मा में स्थित खरीद केंद्र में हिम फ्रेश प्रोड्यूस कंपनी ने सेब खरीदना शुरू कर दिया है। हालांकि बागवान दामों से संतुष्ट नहीं हैं। फल मंडियों में सेब के इससे ज्यादा दाम मिल रहे हैं। 
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गुम्मा में स्थित खरीद केंद्र - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मंडियों के बाद वजन के हिसाब से सेब खरीदने वाली निजी कंपनियों ने भी खरीद शुरू कर दी है। सबसे पहले हिम फ्रेश प्रोड्यूस कंपनी ने रेट लिस्ट जारी की है। कोटखाई के गुम्मा में स्थित खरीद केंद्र में बुधवार से कंपनी ने सेब खरीदना शुरू कर दिया है।

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कंपनी ने लार्ज, मिडियम, स्मॉल (एलएमएस) आकार के सेब का दाम 80 रुपये, एक्स्ट्रा स्मॉल 70 रुपये, 240 नंबर 85 रुपये और सिक्स लेयर का 46 रुपये प्रतिकिलो तक रखा है। हालांकि बागवान दामों से संतुष्ट नहीं हैं। फल मंडियों में सेब के इससे ज्यादा दाम मिल रहे हैं। बड़ी बात यह है कि अदाणी की कंपनी एग्री फ्रेश लिमिटेड ने अभी तक सेब खरीद शुरू नहीं की है। हर वर्ष सबसे पहले यही कंपनी रेट लिस्ट जारी करती थी। इस बार हिम फ्रेश प्रोड्यूस कंपनी ने सबसे पहले किलो के हिसाब से सेब खरीद शुरू कर दी है। इसके दाम से नाखुश बागवान संगठन का कहना है कि यह दाम मंडियों के दाम के मुकाबले बहुत कम है। उधर कंपनी का तर्क है कि इसमें बागवनों की पैकेजिंग का खर्चा भी बच जाएगा और मंडियों के मुकाबले सेब की पेमेंट भी जल्दी मिल जाएगी।

हिम फ्रेश प्रोड्यूस कंपनी के प्रबंधक राजपाल बेक्टा ने बताया कि मंडियों में सेब बेचने के बाद आढ़ती बागवानों के सालों तक पैसे अटका कर रखते हैं। कंपनी 10 से 15 दिनों के अंदर ही खरीदे गए सेब की पेमेंट बागवान के खाते में डाल देती है। जो बागवान सेब बेचने आएगा, उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक डिटेल भी देनी होगी। इसके माध्यम से जल्द से जल्द बागवानों को उनकी फसल का पैसा मिल जाएगा।
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लागत के हिसाब से दाम बहुत कम : संजय चौहान
संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि बागवान की उत्पादन लागत पहले के मुकाबले ढाई गुना बढ़ गई है। उसके मुकाबले कंपनी उन्हें सेब के दाम नहीं दे रही है। आढ़ती, खरीदार और निजी कंपनियां बागवानों के साथ सरेआम लूट कर रही है। सरकार और एपीएमसी मौन है। सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए।
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