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कोरोना का खौफ बरकरार, स्कूलों में इक्का-दुक्का ही छात्र पहुंचे

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कन्या स्कूल हमीरपुर में अध्यापिका से चर्चा करती हुई छात्राएं। - फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। सरकार ने स्कूलों को तो खोल दिया लेकिन कोरोना के डर से अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। जिले में कोरोना के खौफ के चलते अधिकतर स्कूलों में इक्का-दुक्का छात्र ही मार्गदर्शन, पेपर मूल्यांकन का परिणाम जानने और छात्रवृत्ति आदि के फार्म जमा करवाने पहुंचे।
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कई स्कूल तो ऐसे भी हैं जहां एक भी छात्र नहीं आया। इनमें ज्यादातर निजी स्कूल हैं। अभिभावकों से अनुमति लेने वाले छात्रों को ही स्कूल आने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को फार्म भरकर और अभिभावकों के हस्ताक्षर करवाकर स्कूल लाना होगा। इसके बावजूद जिले के अधिकतर स्कूलों में बहुत कम बच्चे स्कूल पहुंचे। अभिभावक बच्चों को महामारी के बीच स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
अमर उजाला ने सोमवार को जिला मुख्यालय के दो सरकारी और एक निजी स्कूल में जाकर हाल जाना। निजी स्कूल में तो दोपहर दो बजे तक कोई छात्र नहीं पहुंचा। एक सरकारी स्कूल में दो तो दूसरे में दर्जन भर छात्र स्कूल पहुंचे। अमर उजाला की टीम सुबह 11 बजे राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर पहुंची। अभी तक यहां महज एक छात्र ही आया था। वह अपना पेपर जमा करवाकर चला गया। करीब सवा 11 बजे एक और छात्र आया। उसने ऑनलाइन परीक्षा की शीट अध्यापक के सुपुर्द की। दोपहर बारह बजे टीम राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर पहुंची। यहां अभी तक चार छात्राएं मार्गदर्शन के लिए पहुंचीं। कुछ छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई में समझ न आने वाले विषयों पर चर्चा के लिए पहुंचीं। कुछ छात्रवृत्ति के फार्म जमा करवाने पहुंचीं।
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कुछ छात्राएं ऑनलाइन परीक्षा के मूल्यांकन के बाद परिणाम जानने स्कूल पहुंचीं। कन्या स्कूल में शाम चार बजे तक एक दर्जन छात्राएं आईं। गुरुकुल पब्लिक स्कूल हमीरपुर में करीब दो बजे दोपहर तक कोई भी विद्यार्थी नहीं आया। इन सभी स्कूलों में 50 फीसदी स्टाफ मौजूद रहा। केंद्रीय विद्यालय हमीरपुर में भी सोमवार को कोई छात्र नहीं आया। प्रधानाचार्य सुनील चौहान ने कहा कि बच्चों को सोमवार की बजाय मंगलवार से स्कूल आने के लिए कहा था। सोमवार को स्कूल में तैयारी की गई और अध्यापकों को दिशानिर्देश दिए। 80 फीसदी बच्चों ने स्कूल न आने की बात कही है। उनकी शंकाएं ऑनलाइन कक्षा से ही दूर की जा रही हैं। 20 फीसदी छात्र शंकाओं के समाधान के कभी-कभार स्कूल आने के लिए कह रहे हैं।
क्या कहते हैं स्कूल आए छात्र
कन्या स्कूल हमीरपुर की जमा दो की छात्रा भावना ने कहा कि अर्थशास्त्र में कुछ चीजें उन्हें समझ नहीं आ रही थीं। उसे समझने के लिए वह स्कूल आई थी। अध्यापक से शंका दूर करने के बाद घर लौट गईं।
कन्या स्कूल हमीरपुर की जमा एक कक्षा की छात्रा शीतल ने कहा कि वह छात्रवृत्ति के फार्म जमा करवाने के लिए स्कूल आई थीं। वह स्कूल में कुछ और अध्यापकों से भी मिली। कई प्रश्नों का हल पाया। वह मास्क पहनकर स्कूल आई।
कन्या स्कूल हमीरपुर की जमा दो कक्षा की छात्रा शिवांगी ने कहा कि अर्थशास्त्र में कई सवाल ऐसे हैं जो ऑनलाइन समझ नहीं आए। इनको समझने के लिए वह स्कूल आई। स्कूल में थर्मल स्क्रीनिंग, रजिस्टर में नाम दर्ज हुआ। मास्क और अभिभावकों की अनुमति फार्म के साथ ही प्रवेश मिला।
क्या कहते हैं प्रधानाचार्य
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कन्या हमीरपुर के प्रधानाचार्य विजय गौतम ने कहा कि सोमवार को अर्थशास्त्र की चार छात्राओं समेत 12 छात्राएं अध्यापकों के मार्गदर्शन के लिए स्कूल आईं। इन्होंने कहा कि अभी भी अधिकतर अध्यापक बच्चों को भेजने से डर रहे हैं। स्कूल आने वाले बच्चों को ही कोविड-प्रोटोकाल में ध्यान में रखकर प्रवेश दिया जाएगा। सरकार के दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा।
राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर की प्रधानाचार्य नीना ठाकुर ने कहा कि स्कूल को पूरी तरह से सैनिटाइज करवाया गया है। सोमवार को दो छात्र ही स्कूल में पेपर सब्मिट करवाने पहुंचे थे। छात्रों के मार्गदर्शन के लिए एक दिन 50 फीसदी स्टाफ ही मौजह्नद रहेगा। जिन छात्रों की कोई शंका विषयों से संबंधित होगी वह मास्क, सैनिटाइजर और अभिभावकों की अनुमति से स्कूल आकर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
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