स्वाहल सरकारी स्कूल का कक्षा कक्ष बन रहा तालाब, पहले बाल्टी लेकर कर रहे सफाई
52 वर्ष पहले निर्मित स्वाहल स्कूल भवन के कमरे बने तालाब
जरा सी बारिश पर कक्षा से पहले कमरों से बाल्टी लेकर निकालना पड़ रहा पानी
दशकों बाद भी पुराने भवन की मरम्मत नहीं, सालों से नए भवन निर्माण का प्रस्ताव लंबित
अंधड़ से क्षतिग्रस्त हो चुकी है स्कूल भवन की पुरानी छत
वर्तमान में स्कूल में प्री-प्राइमरी और पांचवीं कक्षा तक 30 विद्यार्थी हैं दाखिल
बवीता चंदेल
हमीरपुर। जिले में 52 साल पहले बनी राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्वाहल कच्चे भवन में चल रही है। स्कूल का भवन जर्जर है। बारिश में स्लेटनुमा छत टपकती है। क्लास लगाने से पहले बच्चों को बाल्टी लेकर कमरे से बारिश का पानी निकालना पड़ता है। बुधवार देररात हुई बारिश से इस भवन के टूटे स्लेट से पानी कमरों के भीतर आ गया। पाठशाला खुलते ही सुबह सबसे पहले बच्चों ने कमरों से बाल्टी से पानी बाहर निकाला, उसके बाद कक्षाएं शुरू हुईं।
जिले में कुल पांच सरकारी स्कूल भवन ऐसे हैं जो कच्चे और बेहद जर्जर हो चुके हैं। हल्की सी बारिश होने पर नौनिहाल और शिक्षक बाल्टी और झाडू लेकर स्कूल भवन को साफ करते हैं। राजकीय प्राथमिक पाठशाला रोपा स्वाहल में विद्यार्थियों के लिए नए भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। स्कूल में विद्यार्थी जर्जर भवन में डर के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पुराने जर्जर भवन का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। स्कूल में प्री-प्राइमरी से पांचवीं के 30 विद्यार्थी स्लेटपोश खस्ताहाल भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्कूल की पुरानी छत से एक-एक करके स्लेट नीचे गिर रहे हैं। हल्की सी बारिश होने पर स्कूल में पानी जमा हो रहा है और स्कूल में रखा सामान खराब हो रहा है। बुधवार देर रात हुई बारिश के बाद जब सुबह विद्यार्थी और अध्यापक स्कूल पहुंचे तो स्कूल के कमरे में पानी भरा हुआ था। एक घंटे तक विद्यार्थी और अध्यापकों ने पानी को बाहर निकाला और कमरे को बैठने योग्य बनाया। स्कूल का यह भवन काफी पुराना है। कमरे की छत से स्लेट टूटे हुए हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति की ओर से दो वर्ष पूर्व नए भवन निर्माण कार्य के लिए शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा था ताकि विद्यार्थियों को नए भवन की सुविधा मिल सके। अभिभावकों पूजा देवी, सलोचना देवी, राकेश कुमार, प्रदीप कुमार, राजेश, पुनीत, रवि चौहान आदि ने कहा कि स्कूल में तीन कमरे हैं। इनमें से एक कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र चलाया जा रहा है। वहीं, दो कमरों में प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक के 30 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन स्कूल की पुरानी छत से प्रतिदिन स्लेट गिरते रहते हैं। इससे विद्यार्थी खतरे के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वे कई बार शिक्षा विभाग से स्कूल भवन के लिए बजट राशि उपलब्ध करवाने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक स्कूल के लिए बजट राशि नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि स्कूल की छत से हल्की सी बारिश होने पर पानी का रिसाव होता है। इससे विद्यार्थियों को बैठने और शिक्षकों को पढ़ाई करवाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूल की पुरानी छत को बदलने के लिए उन्होंने 4.50 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा स्कूल में दाखिल विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
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रोपा स्वाहल स्कूल भवन निर्माण कार्य की फाइल स्वीकृति के लिए शिक्षा निदेशालय को भेजी गई है। बजट राशि जारी होने के बाद स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरु करवा दिया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अशोक कुमार, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग हमीरपुर